Edited By Mansi,Updated: 06 Aug, 2026 12:16 PM
बटवारा 1947 सनी देओल, प्रीति जिंटा और निर्देशक राजकुमार संतोषी ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत के बंटवारे की दर्दनाक कहानी पर आधारित फिल्म 'बटवारा 1947' रिलीज़ से पहले ही चर्चा में बनी हुई है। फिल्म में सनी देओल और प्रीति जिंटा लंबे समय बाद एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आएंगे, जबकि निर्देशन की कमान राजकुमार संतोषी ने संभाली है। यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। फिल्म के प्रमोशन के दौरान सनी देओल, प्रीति जिंटा और निर्देशक राजकुमार संतोषी ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
सनी देओल
सवाल: ऐसे किरदारों को निभाना और कहानियों को लोगों के सामने लाना कितनी बड़ी जिम्मेदारी लगती है?
ऐसी मैंने काफी कहानियां सुनी हुई हैं इसलिए हमें पता है कि क्या हुआ था। फिर जब मैंने बटवारा की कहानी सुनी तो वो वैसी ही थी जैसे मेरा पापा , बीजी हमारे घर के बड़ों ने बातें कहीं थी , उनको रिलेट करती थी। ग़दर भी मैंने की थी तो उसमें भी कहानी कुछ इसी तरह की थी। लेकिन ये दोनों फ़िल्में एक दूसरे से बिलकुल अलग हैं। मैं एक एक्टर हूँ , जब मुझे कोई कहानी पसंद आती है तो मैं उसके किरदार में खुद को ढाल लेता हूँ। फिर इंतज़ार करता हूँ कि कब इसपर काम शुरू होगा और कब ये रिलीज़ होगी और फिर जब आप लोग तारीफ करते हैं तो पता लगता है कि हम लोग सही ट्रैक पर ही हैं।
सवाल: बटवारा के एक्शन सीन करना आपके लिए कितने चुनौतीपूर्ण रहे थे?
उम्र तो देखो बढ़ रही है और बढ़ती ही रहेगी लेकिन मैंने कभी अपने दिमाग में इस चीज़ को आने ही नहीं दिया। मैं आज भी वो सब कुछ करता हूँ जो मैं पहले करता था। वर्कआउट , प्ले टाइम सब कुछ वैसे ही है , मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मैं ये नहीं कर पाऊंगा या नहीं कर पा रहा। जिस दिन वो महसूस होगा उस दिन नहीं करूँगा।
सवाल: जब धर्मेंद्र जी ने ये फिल्म देखी थी तो उनका क्या रिएक्शन था?
पापा को ये फिल्म बहुत अच्छी लगी थी , फिल्म देखकर भी उन्होंने कहा था की बहुत अच्छी है बस ये है कि इसे रिलीज़ होने में वक्त लग गया था। राज जी ने बताया की पापा ने उनके साथ इससे जुड़े बहुत किस्से भी बताए थे और बताते बताते भावुक हो जाते थे वो।
सवाल: ऐसा कितनी बार हुआ है कि आपको कास्ट करने के लिए धर्मेंद्र जी के पास गए हो मेकर्स?
ऐसा बहुत बार हुआ है। शुरू से ही ऐसा रहा है कि जो पापा ने जो कहा हो वो हम करें ना ऐसा हो नहीं सकता, तो जो पापा बोलते थे मैं वो फिल्म करता था , हाँ ऐसा नहीं बहुत बार हुआ है कि जब पापा ने बोला कि मैं भेज तो रहा हूँ लेकिन करना मत।
सवाल: आप क्या रिएक्शन था जब आपको पता चला कि रील लाइफ में भी करण ही आपका बेटा बनेंगे?
सब्जेक्ट तो मुझे पहले ही पता था और फिर राज ने ही बोला कि मैं कारन को ही कास्ट करना चाहता हूँ आपके बेटे के रोल के लिए तो मैंने कहा कि ये आपकी कॉल है क्यूंकि मैं नहीं चाहता था कि मैं कहूं कि मेरे बेटे को कास्ट करो। और करण ने अपने किरदार को बहुत अच्छे से निभाया भी जो मुझे बहुत अच्छा लगा।
सवाल: सब बोलते हैं कि फ़िल्में एक दूसरे को जोड़ती हैं हर तरह के और हर धर्म से लोग फिल्म को देखते हैं , तो कहीं ना कहीं ऐसा था कि पाकिस्तान के लोग भी उसी तरह से इस फिल्म को देखेंगे जिससे माहौल बना रहे?
हमने उस तरह से नहीं देखा , ये तो एक कहानी है। 2010 में हमने सुनी थी और तब से हम चाह रहे है कि ये बनाए। हम किसी और चीज़ के बारे में नहीं सोच रहे हम तो सिर्फ एक कहानी बना रहे हैं। इतना कुछ हमने सोचा भी नहीं है क्यूंकि में कोई खोट नहीं है।
प्रीती जिंटा
सवाल: आपने जब बटवारा की कहानी सुनी तो सबसे अच्छी चीज़ इसमें क्या लगी?
एक बात मेरे दिल को बहुत छू गई थी वो ये कि असल कहानी जो हमने सुनी उसमें लोगों ने ये सोचा था कि एक छोटा सा बैग लेकर चले जाते है जब सब ठीक हो जाएगा तो वापिस आ जाएंगे , उन्होंने कभी ऐसा सोचा ही नहीं था कि हम सब छोड़ कर जा रहे हैं और कभी वापिस नहीं आएँगे। आज भी हम बातें सुनते हैं कि जब कोई बहुत पुराने घर को तोड़ कर दुबारा बनवाता है तो उसमें सोना चांदी मिले , क्यूंकि उस वक्त में बहुत सारे लोग अपना कीमती सामान ऐसे ही खोद कर छोड़ गए थे कि वापिस आकर लेंगे लेकिन वो वापिस नहीं आ सके। आप जब फिल्म देखेंगे तो उसमें भी ये चीज़ें दिखाई गई हैं। मैंने पहली बार ऐसी पीरियड फिल्म की है तो मैंने तो इसपर बहुत सारी रिसर्च भी की है। जिसे दिल भी बहुत दुखा।
सवाल: आप लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही है ? इतना इंतज़ार क्यों करवाया ? और ऐसा क्या रहा कि आपने इस फिल्म के लिए तुरंत हां कह दी?
सच बताऊं तो मैं अपनी ज़िंदगी में बहुत खुश हूँ और मैं पहले सिर्फ अपनी पर्सनल लाइफ पर फोकस करना चाहती थी। अपने बच्चों को देखना चाहती थी और मैंने अपने उस फेस को बहुत एन्जॉय भी किया। बाकी मैं राज जी के साथ काफी समय से काम करना चाहती थी पहली वजह तो यही है हां बोलने की , दूसरा मैं हमेशा से एक पीरियड फिल्म करना चाहती थी , फिर जब मैंने ये स्क्रिप्ट सुनी तो मैं उस डार्क टाइम में चली गई यहाँ बहुत उमीदें थी।
सवाल: आपके लिए स्टारडम क्या है?
पहले के टाइम में एक्टर्स को लोग उनके किरदारों से पहचानते थे , उन्हें जब उन रोल्स में देखते थे तो उस किरदार के बारे में ही सोचते थे। लेकिन आज समय बहुत बदल गया है , आज आप एक्टर्स को हर वक्त सोशल मीडिया पर देखे है कि वो क्या खाते हैं क्या पहनते है क्या करते हैं , लेकिन पहले ये सब नहीं था। आज मैं भी थिएटर में फ़िल्में सिनेमेटिक एक्सप्रेस के लिए देखने जाते है। उस टाइम फ़िल्में ही होती थी सिर्फ एंटरटेनमेंट का एकलौता जरिया लेकिन आज बहुत कुछ बदल चूका है।
निर्देशक राजकुमार संतोषी
सवाल: आपने इतना टाइम क्यों लगाया प्रीति ज़िंटा को कास्ट करने में?
मैंने एक सब्जेक्ट लिखा था प्रीति के लिए 'दिल है तुम्हारा' , मैं उस फिल्म को डायरेक्ट करना चाहता था लेकिन किसी और फिल्म की कमिटमेंट की वजह से मैं उसे डायरेक्ट नहीं कर पाया लेकिन फिर मेरे अच्छे दोस्त कुंदन शाह ने डायरेक्ट की लेकिन नरेट मैंने की थी प्रीति को वो कहानी। एक और बात जो शायद किसी को पता नहीं कि जो रोल उस फिल्म में जिमी शेरगिल ने निभाया था वो पहले सनी देओल करने वाले थे , इन्फेक्ट सनी देओल ने डॉल के साथ प्रैक्टिस भी की थी।
सवाल: फिल्म में सनी देओल से एक्शन सीन करवाने का एक्सपीरियंस कैसा रहा?
सनी देओल बॉडी डबल तो नहीं के बराबर इस्तेमाल करते हैं। तबियत ठीक है या नहीं खुद ही ज़्यादा सीन इन्होने किये हैं। अब कहते भी थे कि रहने दो मगर ये खुद ही करते थे। तांगा चलाने वाला शॉट भी सनी देओल ने खुद ही किया है।
सवाल: बटवारा को लेकर पहले भी कई फ़िल्में बन चुकी हैं तो इस बार आप इस फिल्म के जरिये क्या बातें नए सिरे से कहना चाहते हैं ? और क्या वजह रही जो आपने ये फिल्म शुरू की ?
बंटवारे पर तो ऐसी ऐसी घटनाएं हमारी हिस्ट्री में दर्ज हैं जिसपर बहुत सारी फ़िल्में बन सकती हैं और अगर मैं इस फिल्म की बात करूं तो इसमें मुझे एक चीज़ बहुत पसंद आई और वो है हिंसा के बीच इमोशंस। कि इंसान को इंसान की तरह देखें ना कि हिन्दू मुसलमान की तरह। गलतियां दोनों तरफ से हुई है लेकिन वो दौर ऐसा था कि हमने उसमें बहुत अच्छे और बहुत बुरे इंसान भी देखे। कुछ लोगों ने तो बहादुरी और कुर्बानियों की मिसाल कायम की है। और ये फिल्म असल में इंसानी रिश्तों के ऊपर ही है।
सवाल: आमिर खान एक प्रोडूसर के तौर पर कैसे हैं ?
शानदार , उन्होंने सिर्फ पैसा ही नहीं लगाया बल्कि इन्वॉल्वमेंट भी उनकी पूरी रही है फिल्म में , कम से कम 25 - 30 बार तो नरेशन ही सुना होगा बारीकी से , और ये कहानी जितनी मेरे ज़हन में है उससे कही ज़्यादा उन्होंने अपने ज़हन में रखी होगी। एडिटिंग में भी उन्होंने पूरी क्रिकट परफॉर्मेंस देखी है। जहां उन्हें डबिंग अच्छी नहीं लगी साथ जाके डबिंग करवाई ताके हर चीज़ परफेक्ट होक निकले। उन्हें ऐसे ही मिस्टर परफेक्शनिस्ट नहीं करते वो हर चीज़ को परफेक्ट बनाते हैं। वो ऑडियंस को बहुत प्यार करते हैं और चाहते हैं कि ऑडियंस के पास अच्छी तरह से फिल्म पहुंचे और सही फिल्म पहुंचे।