INTERVIEW: 'दोस्त मेंटल होते हैं जजमेंटल नहीं, उनके साथ हर लम्हा खास होता है'- तमन्ना भाटिया

Edited By Varsha Yadav,Updated: 09 Jun, 2023 04:37 PM

tamannaah bhatia interview for upcoming web series jee karda

हाल ही में 'जी करदा' का ट्रेलर रिलीज हुआ है जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। इस मौके पर 'जी करदा' के बारे में तमन्ना भाटिया, सुहेल नय्यर, संवेदना सुवालका और सायन बनर्जी ने पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स/जगबाणी/ हिंद समाचार से खास बातचीत की है-

नई दिल्ली। आमतौर पर आपने तीन से चार दोस्तों की कहानी फिल्मों में देखी होगी लेकिन अपकमिंग वेब सीरीज 'जी करदा' में पूरे सात दोस्तों की कहानी को बेहद मजेदार तरीके से दिखाया गया है। यह सीरीज 15 जून 2023 को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी, जिसमें तमन्ना भाटिया, सुहेल नय्यर, संवेदना सुवालका, आन्या सिंह, हुसैन दलाल और सायन बनर्जी जैसे बेहतरीन एक्टर्स मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। तमन्ना भाटिया की यह पहली हिंदी वेब सीरीज है, जिसका निर्देशन अरुणिमा शर्मा ने किया है। हाल ही में 'जी करदा' का ट्रेलर रिलीज हुआ है जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। इस मौके पर 'जी करदा' के बारे में तमन्ना भाटिया, सुहेल नय्यर, संवेदना सुवालका और सायन बनर्जी ने पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स/जगबाणी/ हिंद समाचार से खास बातचीत की है-


(तमन्ना भाटिया)
सवाल- यह आपकी पहली हिंदी वेब सीरीज है इसके लिए आप कितनी एक्साइटेड हैं?
जवाब-
मैं 'जी करदा' के लिए सच में बहुत एक्साइटेड हूं। इससे पहले मैंने ऑन सॉन्ग स्ट्रक्चर्स में काम किया है, इसलिए मैं इसके महत्व को भी अच्छे से समझती हूं। वहीं जब कहानी दर्शकों से सीधे कनेक्ट होती है तो मुझे बहुत खुशी होती है। मैं मुंबई से हूं लेकिन आज तक मुझे ऐसा रोल निभाने का मौका नहीं मिला जो मुझसे इतना क्लोज हो। यह वेब सीरीज मेरे लिए काफी खास है क्योंकि इससे पहले ज्यादातर मैंने लार्जर दैन लाइफ कैरेक्टर किए हैं या सिनेमैटिक पोट्रेट ऑफ थिंग्स किए हैं, लेकिन यह मेरा बहुत रियलिस्टिक प्रेजेंटेशन रहेगा। मैं बहुत खुश हूं कि मुझे यह रोल मिला और इस निभाने की पूरी जर्नी मैंने काफी एंजॉय की है।

सवाल- लावण्या या बबली बाउंसर जैसे किरदार में से कौन सा रोल आपके लिए आसान है?
जवाब-
मेरे हिसाब से दोनों ही किरदारों की अपनी-अपनी चुनौतियां हैं। जिसमें आपको पूरी तरह से किसी और में ढ़लना पड़ता है और एक तरीके से जो अंतर आप में बच जाता है उन्हें स्क्रीन पर बताना ज्यादा जरूरी हो जाता है। अरुणिमा और ऐसे कई किरदार हैं जिसमें मेरी खुद की पर्सनैलिटी बिल्कुल भी नहीं झलकती। वहीं यह सीरीज सात लोगों की दोस्ती के सफर को दिखाती है, जिसे हम ऑडियंस के तौर पर भी जज नहीं करते हैं और न ही जब हमने परफॉर्म किया तब हमने कैरेक्टर के तौर पर उसे जज किया। दोस्ती की बात करें तो दोस्त मेंटल होते हैं जजमेंटल नहीं, उनके साथ हर लम्हा खास होता है।

सवाल- ऐसी कौन सी चीज है जो आप में इन परफेक्ट है लेकिन फिर भी आप परफेक्ट हैं?
जवाब-
सबसे बड़ी चीज जो मुझे लगती है वो ये है कि अब फाइनली बड़े हो जाओ, कब तक बच्चे रहोगे। तुम्हें खुद ही अपनी देखभाल करनी है उसके लिए कोई दूसरा नहीं आएगा। जब आप 20 के होते हैं तो ऐसा ज्यादा नहीं लगता है लेकिन जैसे ही आप 30 के होते हैं, आपकी सारी एक्सपेक्टेशन बढ़ जाती है। अक्सर लोग कहते न हैं कि आप 10वीं कर लो आपकी लाइफ सेट हो जाएगी, फिर आप 12वीं कर लो लाइफ सेट हो जाएगी, फिर वो लोग कहते हैं कि ग्रेजुएशन कर लो आपकी लाइफ सेट हो जाएगी, फिर शादी कर लो लाइफ सेट हो जाएगी। मैं कहना चाहूंगी कि ये बिल्कुल झूठ है। जैसी सोच आपकी पहले होती और जैसी लाइफ आपकी बन जाती है उसमे काफी अंतर होता है।


(सुहेल नय्यर)
सवाल- 'जी करदा' का पार्ट आप कैसे बने?
जवाब-
मैंने इसका ऑडिशन दिया था जिसका प्रोसेस बहुत लंबा रहा। अरूणिमा उस समय सोच रही थी कि किस तरह स्टार को कास्ट करना है। फिर हमारी मीटिंग हुई तो उन्होंने कहा कि आप दिल्लीवाले ज्यादा लगते हैं और यह किरदार मुंबई वाला है। वैसे तो मुझे मुंबई में 9 साल हो गए हैं लेकिन जब आप अपने शहर से दूर रहते हैं तो उसकी कुछ चीजें अपने साथ रखते हैं। मेरी भाषा में वो साफ झलकता है, इसीलिए अरुणिमा को उस समय लगा कि तुम तो बहुत ज्यादा दिल्लीवाले लगते हो, मुंबई वाले कैसे बनोगे। मैंने उनसे कहा कि थोड़ा भरोसा रखो। इसके बाद उन्होंने थोड़ा भरोसा रखा और मैंने थोड़ी मेहनत की। 'जी करदा' बहुत कमाल का एक्सपीरियंस रहा क्योंकि मैंने लाइफ में ऐसा कोई किरादर प्ले नहीं किया था। इससे पहले मैंने कॉमेडी की है या बहुत डार्क कैरेक्टर किए हैं।


सवाल- बचपन से लेकर अब तक आपकी लाइफ किस तरह बदली है?
जवाब-
मैं 33 का हूं लेकिन जितनी समझ मुझे पिछले तीन सालों में आई है उतनी समझ पूरी जिंदगी में नहीं आई। यह ताउम्र चलता रहेगा जैसे जब मैं 37 को होऊंगा तब लगेगा कि 33 में मैं पागल था। मुझे हमेशा से एक चीज से बहुत त्रुटि होती है जब मैं कैरेक्टर्स को देखता हूं, तो लगता है कि इन्हे सब पता कैसे है क्योंकि असल जिंदगी में हमें कुछ भी पता नहीं होता। ऐसे में मुझे अपना किरदार बहुत ही ओपन रखना अच्छा लगता है। कमाल की बात है कि मेरा किरदार इस शो में उसी तरह लिखा गया है जैसे मैं उसे प्ले करना चाहता था। लावण्या की लाइफ में अपने सेट गोल्स हैं लेकिन ऋषभ उससे बहुत अलग है।


(संवेदना सुवालका)
सवाल- जब भी आप अपने दोस्तों के साथ होती हैं तो कौन सी 'जी करदा' वाली चीजें करने का मन करता है?
जवाब-
संवेदना मुस्कुराते हुए कहती है कि जी करदा था कि शूट चलता ही जाए और बंद न हो क्योंकि हम सभी के किरदारों की खासियत है कि हमारी अपनी-अपनी कहानी चल रही होती है और हम सभी साथ में भी आते हैं लेकिन ये साथ बहुत थोड़ा सा समय होता था।वहीं जब अपनी कहानी चलती थी तो सभी सीरियस होते थे। तो जी यही करदा था कि साथ वाला शूट ज्यादा हो क्योंकि साथ में काम कम और मस्ती ज्यादा लगती थी। तो हमेशा यही लगता था कि ये चलती जाए।

सवाल- बचपन की ऐसी कौन सी चीज है जिसे आपने सेट पर दोबारा से जिया हो?
जवाब-
आप लाइफ में कितना भी कर लो, कहीं भी पहुंच जाओ.. आपके बचपन के दोस्त हमेशा वैसे ही रहते हैं। उनके लिए तुम वही हो, जैसा उन्होंने आपको देखा था। इसीलिए तुम वही हो और वहीं रहो। यही चीज मैंने इस शो में देखी कि सबकी अपनी-अपनी जर्नी है इसके बाद सभी साथ में भी हैं।


(सायन बनर्जी)
सवाल- इस वेब सीरीज में आपके लिए सबसे बेस्ट पार्ट क्या रहा ?
जवाब-
मुझे बहुत प्राउड फीलिंग है कि मैं इस शो के साथ जुड़ा। यह मेरा पहला बड़ा शो है, इससे पहले भी मैं काम तो कर चुका हूं लेकिन वो इस लेवल पर नहीं था। ऑडिशन का बहुत लंबा प्रोसेस था सभी चीजों में करीब एक साल लग गया, लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ते ही मुझे लगा था कि ये बहुत मजेदार शो है। एक तो सात दोस्तों की कहानी और जिस तरह से अरुणिमा ने उसे विजुअलाइज किया है हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा। यह कहानी नॉर्मल कहानियों के काफी अलग है। सात दोस्तों की कहानियों को उन्होंने बेहद खास अंदाज से पेश किया है।

सवाल- काम मिलने के बाद जब दोस्तों से कम मिलते हैं तो उनकी कौन सी बातें आपको सुनने को मिलती हैं?
जवाब-
सायन कहते हैं कि मेरा लकी फेक्टर ये है कि मेरे जितने भी बचपन के दोस्त हैं वो सभी टच में रहते हैं। जब वह मुंबई आते हैं तो हम सभी मिलते हैं। इसके अलावा हम जितने भी दोस्त हैं वो सभी टच में रहते हैं और जब मिलते हैं तो ऐसा लगता ही नहीं है कि सालों बाद मिल रहे हैं। बातें फिर वहीं से शुरू होती है जहां से खत्म हुई थी।

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