सीरीज के बारे में .परमवीर सिंह चीमा,रणवीर शौरी, अल्फिया जाफरी और दोनों निर्देशकों ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश..
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नेटवर्क मार्केटिंग और झटपट अमीर बनने के सपनों के पीछे छिपे सच को उजागर करती है TVF की नई सीरीज 'द पिरामिड स्कीम'। यह कहानी एक ऐसे युवा की है, जो बेहतर जिंदगी की तलाश में मल्टी-लेवल मार्केटिंग के जाल में फंस जाता है। The Pyramid Scheme में दिखाया गया है कि कैसे बड़े सपने और लालच धीरे-धीरे इंसान की जिंदगी और रिश्तों पर भारी पड़ने लगते हैं। श्रेयांश पांडे,आशीष आर. शुक्ला द्वारा रिलीज ये सीरीज 5 जून को प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। सीरीज के बारे में .परमवीर सिंह चीमा,रणवीर शौरी, अल्फिया जाफरी और दोनों निर्देशकों ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश..
आशीष आर. शुक्ला
सवाल: इस शो के लिए तैयारी करते समय क्या आपने महसूस किया कि ऐसी स्कीमें आज भी उतनी ही सक्रिय हैं जितनी पहले हुआ करती थीं?
जवाब- बिल्कुल। हम सभी के पास ऐसी कहानियां थीं किसी की मां, किसी के चाचा, किसी के दोस्त या पड़ोसी इस तरह के जाल में फंस चुके थे। हमें भी लगता था कि शायद ये पुरानी बात हो गई होगी, लेकिन अगर आज आप सोशल मीडिया पर थोड़ा समय बिताएं और इस तरह के कंटेंट के एल्गोरिद्म में फंस जाएं, तो आपकी पूरी फीड ऐसी ही वीडियो से भर जाएगी।
भारत में आज भी यह बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है। हर दिन नए-नए तरीके के स्कैम सामने आते हैं। लोग सोशल मीडिया पर करोड़ों की लाइफस्टाइल दिखाते हैं, महंगी घड़ियां, लग्जरी कारें, हेलिकॉप्टर तक दिखाते हैं और युवाओं को सपना बेचते हैं कि कुछ महीनों में उनकी जिंदगी बदल जाएगी। यही इस कहानी की प्रासंगिकता है।
परमवीर सिंह चीमा
सवाल: इस शो में आपका किरदार ऐसे लोगों के बीच है जो एक-दूसरे के सपनों को सपोर्ट करते हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब- यह कहानी सपनों की भी है। मेरा सपना पैसा कमाना है, किसी और का सपना कुछ और हो सकता है। फिर ऐसे लोग एक-दूसरे से जुड़ते जाते हैं और एक पिरामिड बनता जाता है। यही चीज़ इस तरह की स्कीमों की सबसे बड़ी ताकत होती है। लोगों को उनके सपने बेचे जाते हैं और फिर वही लोग आगे जाकर दूसरों को वही सपने बेचते हैं। यही इस कहानी का मूल है। हम सभी छह महीने में हेलिकॉप्टर खरीदने के सपने देखने लगते हैं। यह शो इसी मानसिकता और उसके पीछे छिपे खेल को दिखाता है।
सवाल: ये साल आपके लिए बेहद शानदार साल रहा है। आपके हिसाब से आप ऐसा क्या अलग कर रहे हैं?
जवाब- सबसे पहली चीज़ है ईमानदारी। जो भी काम करो, अच्छे इरादे से करो। अगर किसी काम को लेकर आपके मन में दो राय हैं, तो उसे मत करो। अपने काम के प्रति वफादार रहो, अपने निर्देशकों पर भरोसा करो और सही लोगों का चुनाव करो। सबसे जरूरी बात है कि हर दिन खुद पर काम करते रहो।
कई बार सफलता मिलने के बाद दिमाग में यह आ जाता है कि अब सब हासिल हो गया है, लेकिन मेरे साथ ऐसा पहले हो चुका है और उसके बाद मैं बहुत नीचे भी गिरा हूं। इसलिए अब मैं खुद को हमेशा जमीन से जुड़ा रखने की कोशिश करता हूं। लोग कहते हैं कि तुम्हारे साथ बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन मैं कोशिश करता हूं कि वैसा ही रहूं जैसा पहले था।
सवाल: आपने कई निर्देशकों के साथ काम किया है। इस शो में दो निर्देशक थे। यह अनुभव कैसा रहा?
जवाब- मैंने अलग-अलग तरह के निर्देशकों के साथ काम किया है। कहीं एक निर्देशक होता है, कहीं कई निर्देशक होते हैं। लेकिन यहां खास बात यह थी कि दोनों निर्देशक हर दृश्य को साथ मिलकर निर्देशित कर रहे थे। कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि दोनों का विज़न अलग है। अगर मैं किसी एक के पास जाकर कोई सुझाव देता था तो दूसरा भी उसी उत्साह से उस पर चर्चा करता था। दोनों हमेशा एक ही पेज पर रहते थे।
उन्होंने मिलकर इतना बड़ा और दिलचस्प संसार तैयार किया है कि हम मजाक में कहते थे कि इसके कई सीजन बन सकते हैं। उनके साथ लेखक अक्षेंद्र भी लगातार मौजूद रहते थे। इस वजह से पूरा शो बेहद समृद्ध और मनोरंजक बन पाया।
अल्फिया जाफरी
सवाल: कलाकारों को दो श्रेणियों में बांटा जाता है कुछ को बचपन से एक्टिंग का शौक होता है कुछ दूसरे क्षेत्र से आते हैं। आप खुद को किस श्रेणी में मानती हैं?
जवाब- बचपन में मुझे लगता था कि मैं एक टिपिकल हीरोइन बनूंगी, बिल्कुल करिश्मा कपूर की तरह। लेकिन जैसे-जैसे बड़ी हुई, मुझे महसूस हुआ कि शायद मैं वह नहीं करना चाहती। मैंने कई साल तक कास्टिंग में काम किया और उस काम में भी खुश थी। लेकिन कैमरे के सामने आने का एक अलग ही आकर्षण होता है। एक बार जब आप कैमरे के सामने आ जाते हैं, तो फिर वहीं रहना चाहते हैं। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
सवाल: आपके किरदार के बारे में ऐसी कौन-सी बात है जो ट्रेलर में दिखाई नहीं देती?
जवाब- मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि इस लड़की की कहानी में बहुत कुछ और है। वह सिर्फ किसी स्कीम को बेचने वाली लड़की नहीं है। असल में वह खुद भी बहुत कम उम्र में इस स्कीम का हिस्सा बन जाती है। उसकी पूरी यात्रा क्या है, वह इस जाल में कैसे फंसती है और आखिरकार इससे बाहर निकलने की कोशिश कैसे करती है, यही उसके किरदार का दिल है। वह पूरी तरह से नहीं समझती कि क्या हो रहा है, लेकिन अपनी परिस्थितियों में बहती चली जाती है। उसके बारे में और जानने के लिए शो देखना पड़ेगा।
सवाल: इंडस्ट्री में नेटवर्किंग को लेकर चर्चा होती है। क्या एक्टर के तौर पर आपने कभी नेटवर्किंग का इस्तेमाल काम पाने के लिए किया है?
जवाब- आप लोगों को जान सकते हैं, वे आपको एक-दो मीटिंग दे सकते हैं, लेकिन अगर आपके पास प्रतिभा नहीं है तो आप कहीं नहीं पहुंचेंगे। मेरे पिता लेखक और निर्देशक हैं, लेकिन उससे भी अधिकतम मुझे एक मीटिंग मिल सकती है। उसके बाद मुझे खुद को साबित करना पड़ता है। आप हर बड़ी पार्टी में जा सकते हैं, मीडिया में छा सकते हैं, लेकिन अगर आपके पास काम करने की क्षमता नहीं है तो उससे कुछ हासिल नहीं होगा। और अगर आपके अंदर प्रतिभा है और किस्मत भी साथ है, तो अवसर खुद आपके पास आएंगे।
श्रेयांश पांडे
सवाल: जब कोई निर्देशक और लेखक मिलकर किसी शो पर काम करते हैं तो सबसे मुश्किल चरण कौन-सा होता है?
जवाब- दोनों ही बेहद मुश्किल होते हैं। लेकिन इस शो के संदर्भ में कहूं तो ग्रीनलाइट मिलना सबसे कठिन था, क्योंकि इस शो को बनने में लगभग 15 साल लगे। अक्षेंद्र ने 2012 में इसे लिखना शुरू किया था। 2016 तक मैं इसे लेकर अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस के पास जाता रहा, लेकिन कहीं बात नहीं बनी। आखिरकार शौरी ने कहा कि अगर कोई इसे नहीं बना रहा है तो वह कोशिश करेंगे। इसलिए इस शो को ग्रीनलाइट मिलने में ही बहुत लंबा समय लग गया।
रणवीर शौरी
सवाल: सीरीज को दर्शकों के लिए किस तरह खास बनाया गया है?
जवाब- सभी जानते हैं कि पिरामिड स्कीम कैसे काम करती है और एक दिन ढह जाती है। सवाल यह था कि इस कहानी को अलग क्या बनाता है। लंबी रिसर्च के बाद हमें महसूस हुआ कि यह पैसे खोने की कहानी नहीं है, बल्कि उन रिश्तों की कहानी है जो ऐसे स्कैम के कारण टूट जाते हैं। जब लोग इसमें फंसते हैं और सब कुछ बिखर जाता है, तो जो भावनात्मक और सामाजिक नुकसान होता है, वह अक्सर अपूरणीय होता है। हम नुकसान की कहानी कहना चाहते थे और उसे व्यंग्य, हास्य और ड्रामा के साथ पेश करना चाहते थे। यही सबसे कठिन हिस्सा था।
सवाल: सीरीज से आपको व्यक्तिगत तौर पर क्या सीखने को मिले?
जवाब- रिश्ते लेन-देन पर आधारित नहीं होने चाहिए। अगर मैं आपके साथ बैठकर समय बिता रहा हूं तो सिर्फ इसलिए नहीं कि मुझे आपसे काम चाहिए। इसी तरह अगर आप किसी पार्टी में जा रहे हैं तो सिर्फ इस सोच के साथ मत जाइए कि वहां किससे मिलना है और क्या फायदा मिलेगा। जीवन और रिश्तों को थोड़ा सहज रहने देना चाहिए। कई बार सबसे अच्छे अवसर वहीं से आते हैं जहां आप सिर्फ इंसानियत और दोस्ती के लिए जुड़े होते हैं।