अन्नामृत फाउंडेशन: कुपोषण, असाक्षरता और गरीबी के खिलाफ एक सशक्त सामाजिक आंदोलन

Edited By Updated: 04 Feb, 2026 06:49 PM

annamrita foundation social movement against malnutrition and illiteracy

भारत में आज भी गरीब, असहाय और वंचित समुदायों तक पोषण और शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी सामाजिक चुनौती बना हुआ है।

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत में आज भी गरीब, असहाय और वंचित समुदायों तक पोषण और शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी सामाजिक चुनौती बना हुआ है। यह समस्या केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर फैली हुई है। हरियाणा जैसे प्रगतिशील राज्य में भी कुपोषण और शिक्षा से जुड़ी चुनौतियां आज मौजूद हैं। इन्हीं समस्याओं के स्थायी समाधान के उद्देश्य से अन्नामृत फाउंडेशन एक सशक्त सामाजिक आंदोलन के रूप में उभरा है, जो राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ हरियाणा को केंद्र में रखकर ज़मीनी स्तर पर ठोस काम कर रहा है।

क्या है अन्नामृत फाउंडेशन?
अन्नामृत फाउंडेशन, जिसे पहले ISKCON Food Relief Foundation के नाम से जाना जाता था, साल 2004 में स्थापित एक गैर-लाभकारी, गैर-सांप्रदायिक और सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है। संस्था का मेन उद्देश्य है “No child goes hungry”, यानी कोई भी बच्चा भूखा न रहे। फाउंडेशन का लक्ष्य जरूरतमंद बच्चों और समुदायों तक पौष्टिक, सुरक्षित और सम्मानजनक भोजन पहुंचाना है, ताकि भूख बच्चों की शिक्षा और भविष्य के सपनों में बाधा न बने। यह सेवा धर्म, जाति, लिंग या समुदाय के किसी भी भेदभाव के बिना दी जाती है।

भूख और कुपोषण के खिलाफ मिशन
संयुक्त राष्ट्र की State of Food Security and Nutrition in the World (SOFI) Report 2025–26 के अनुसार भारत की लगभग 12 प्रतिशत आबादी आज भी कुपोषण से जूझ रही है। बच्चों में स्टंटिंग और वेस्टिंग जैसी समस्याएं यह स्पष्ट करती हैं कि पोषण की कमी का सीधा असर शिक्षा और मानसिक विकास पर पड़ता है। हरियाणा में भी NFHS-5 जैसे सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण, एनीमिया और असंतुलित आहार की समस्या से ग्रस्त हैं। अन्नामृत फाउंडेशन इस संकट को केवल आंकड़ों की चुनौती नहीं, बल्कि “मानवीय गरिमा की लड़ाई” मानता है। संस्था का विश्वास है कि जब तक बच्चे का पेट भरा नहीं होगा, तब तक शिक्षा और सशक्तिकरण अधूरे रहेंगे।

PM POSHAN योजना में अहम भागीदारी
भारत सरकार की प्रमुख योजना PM POSHAN (पूर्व में मिड-डे मील योजना) के तहत अन्नामृत फाउंडेशन एक प्रमुख क्रियान्वयन साझेदार है, विशेषकर हरियाणा में। सरकार के साथ मिलकर संस्था यह सुनिश्चित कर रही है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को नियमित, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले। इसका सकारात्मक असर न केवल बच्चों की सेहत पर पड़ा है, बल्कि स्कूल नामांकन, उपस्थिति और सीखने के परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

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    हरियाणा में अन्नामृत का प्रभाव
    अन्नामृत फाउंडेशन वर्तमान में हरियाणा के चार प्रमुख क्षेत्रों— गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, पलवल और फ़रीदाबाद से संचालन कर रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह राज्य में संचालित सबसे बड़े स्कूल-आधारित पोषण अभियानों में से एक है, जो बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।

    प्रमुख पहल और कार्यक्रम

    अन्नामृत फाउंडेशन की प्रमुख पहलों में शामिल हैं-
        •    PM POSHAN कार्यक्रम – सरकारी स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक भोजन
        •    Annamrita Karuna – महामारी, बाढ़ और आपदा के समय राहत भोजन
        •    Kit of Joy – कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए पोषण किट
        •    Tithi Bhoj – जन्मदिन व त्योहारों को सेवा से जोड़ने की पहल
        •    Khichdi Drive और Karuna Hospital Program – अस्पतालों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए भोजन

    इन पहलों के माध्यम से संस्था केवल भोजन नहीं, बल्कि सम्मान, करुणा और सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है।

    राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और पारदर्शिता
    अन्नामृत फाउंडेशन की आधुनिक रसोईयां हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और त्रिपुरा सहित कई राज्यों में संचालित हैं, जहां से रोज़ाना लाखों बच्चों तक भोजन पहुंचाया जाता है। संस्था दानदाताओं के प्रति पूरी पारदर्शिता रखती है। सभी दान आयकर अधिनियम की धारा 80G के अंतर्गत कर-छूट योग्य हैं, जिससे सामाजिक सेवा के साथ वित्तीय लाभ भी संभव होता है।

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