Edited By Sahil Kumar,Updated: 20 Mar, 2026 04:52 PM

ईरान के कोम शहर में 19 वर्षीय पहलवान सालेह मोहम्मदी और दो अन्य प्रदर्शनकारी, सईद दावोदी और मेहदी कासेमी को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई। उन पर 8 जनवरी के विरोध प्रदर्शनों में दो पुलिसकर्मियों की हत्या और मोहम्मदी पर "ईश्वर के खिलाफ युद्ध" का आरोप...
नेशनल डेस्कः ईरान के कोम शहर में गुरुवार को 19 वर्षीय उभरते पहलवान सालेह मोहम्मदी और दो अन्य प्रदर्शनकारी सरेआम फांसी पर लटका दिए गए। देश की मीडिया और मानवाधिकार समूहों के अनुसार यह कदम देश में बढ़ रहे विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सरकार की कड़ी कार्रवाई का प्रतीक है। है।
आरोप और न्यायिक प्रक्रिया
तीनों पर आरोप था कि उन्होंने 8 जनवरी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो पुलिसकर्मियों की हत्या में भाग लिया। इसके अलावा, मोहम्मदी पर "ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने" का आरोप भी लगाया गया था, जो ईरान में मृत्यु दंड के अंतर्गत आता है। राज्य मीडिया ने बताया कि फांसी कोम में जनता की मौजूदगी में सरेआम कराई गई।
दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान यह पहली बार है कि प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दी गई है।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
ईरान ह्यूमन राइट्स (IHRNGO) के निदेशक महमूद अमीरी-मोगद्दम ने कहा कि ये मृत्युदंड "असंतोषजनक और अनुचित मुकदमों के बाद" सुनाए गए। उनका कहना है कि यह निर्णय "यातना और दबाव में लिए गए कबूलनामों" पर आधारित है और इसे न्यायेतर हत्याओं के रूप में देखा जाना चाहिए।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी फांसी की आलोचना की, यह कहते हुए कि तीनों को अपनी रक्षा का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और मुकदमे की प्रक्रिया इतनी जल्दी पूरी की गई कि इसे निष्पक्ष नहीं माना जा सकता।
खेल और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह घटना 2020 में ईरान के मशहूर पहलवान नवीद अफकारी को दी गई फांसी की याद दिलाती है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध हुआ था। ईरानी कॉम्बैट एथलीट और मानवाधिकार कार्यकर्ता नीमा फर ने इसे "खुली राजनीतिक हत्या" करार दिया। उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर खिलाड़ियों और प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रही है ताकि विरोध की आवाज को दबाया जा सके। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों से अपील की कि ईरान को तब तक प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित किया जाए जब तक वह एथलीटों और प्रदर्शनकारियों को फांसी देना बंद नहीं करता।