Edited By Tanuja,Updated: 15 Apr, 2026 11:30 AM

अंडमान सागर में मलेशिया जा रही एक नाव डूबने से करीब 250 लोग लापता हो गए, जिनमें रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने इसे गंभीर मानवीय संकट बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद बढ़ाने की अपील की है।
International Desk: हाल ही में अंडमान सागर में मलेशिया जा रही एक नाव पलटने से कम से कम 250 लोग लापता हो गए हैं, जिनमें रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी और प्रवासन एजेंसियों ने बताया कि इस घटना के बाद किसी खोज अभियान की स्थिति बुधवार तक स्पष्ट नहीं हो सकी और न ही यह पता है कि नौका कब डूबी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने मंगलवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि यह नाव टेकनाफ से रवाना हुई थी, जो बांग्लादेश के दक्षिणी जिले कॉक्स बाजार में स्थित है और इसमें बड़ी संख्या में यात्री सवार थे जो मलेशिया जा रहे थे।
एजेंसियों के अनुसार, अधिक भीड़, तेज हवाओं और उफनते समुद्र के कारण नाव का नियंत्रण बिगड़ गया और वह डूब गई। यूएनएचसीआर और आईओएम ने कहा कि यह घटना रोहिंग्या लोगों के लंबे समय से चले आ रहे विस्थापन और स्थायी समाधान के अभाव को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि म्यांमा के रखाइन प्रांत में जारी हिंसा के कारण रोहिंग्या शरणार्थियों की देश में सुरक्षित वापसी अनिश्चित बनी हुई है।
साथ ही शरणार्थी शिविरों में सीमित मानवीय सहायता, शिक्षा और रोजगार तक सीमित पहुंच उन्हें जोखिम भरी समुद्री यात्राएं करने के लिए मजबूर कर रही है, जो अक्सर बेहतर वेतन और अवसरों के झूठे वादों पर आधारित होती हैं। यूएनएचसीआर और आईओएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए जीवन रक्षक सहायता सुनिश्चित करने हेतु वित्तीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत किया जाए। बांग्लादेश ने म्यांमा से आए 10 लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण दे रखी है।