Edited By Tanuja,Updated: 23 Mar, 2026 08:08 PM

मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते चीन ने संभावित ईंधन संकट को देखते हुए पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए उसने पहले से तैयारी...
International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब सीधे चीन की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। संभावित ईंधन संकट को देखते हुए चीन ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। यह फैसला National Development and Reform Commission (NDRC) ने लिया है। सरकारी बयान के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना, आम लोगों पर असर कम करना और ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
नई दरों के तहत पेट्रोल (गैसोलीन) की कीमत में 1160 युआन प्रति टन की बढ़ोतरी, डीजल की कीमत में 1115 युआन प्रति टन की बढ़ोतरी की गई है। इस घोषणा के बाद चीन में बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल पंपों पर पहुंच गए और अपने वाहनों में ईंधन भरवाने लगे, जिससे संभावित संकट की गंभीरता साफ दिखाई दे रही है। इस संकट की जड़ में Strait of Hormuz है, जो दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग है। यहां से करीब 20% वैश्विक ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण इस मार्ग पर खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
चीन की स्थिति इसलिए ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि वह अपनी जरूरत का करीब 70% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से लगभग 45% तेल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है यानी कुल सप्लाई का लगभग 30% हिस्सा सीधे इस मार्ग पर निर्भर है।हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन ने इस खतरे को कम करने के लिए कुछ मजबूत कदम पहले से उठा रखे हैं। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषक एंड्रयू टिल्टन के अनुसार, चीन की ऊर्जा व्यवस्था अन्य देशों की तुलना में थोड़ी सुरक्षित है। इसकी वजहें हैं चीन के पास करीब 4 महीने का आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है। रूस के साथ लंबे समय के ऊर्जा समझौते के कारण चीन पर तुरंत असर सीमित हो सकता है, लेकिन अगर संकट लंबा चला तो स्थिति गंभीर हो सकती है।