प्रभुत्व की जंग में फंसा बेचारा ग्रीनलैंड, ट्रंप से डरे डेनमार्क ने EU से मांगा सहारा ! 4 तरीके से समझें क्या है असली राज?

Edited By Updated: 10 Jan, 2026 09:25 PM

four ways to understand what s going on with us denmark greenland

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और यूरोप के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप की आक्रामक नीति ने यूरोपीय सहयोगियों का भरोसा तोड़ा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संकट केवल भू-राजनीति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था और संसाधनों की लड़ाई का संकेत है।

International Desk: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और यूरोपीय संघ के बीच तनाव तेजी से गहराता जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों की खुली धमकियों के बाद यूरोपीय देश, खासकर डेनमार्क, स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया देने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाक्रम केवल ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक सत्ता संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत हैं। वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन का आत्मविश्वास और बढ़ा है। अब अमेरिका सीधे तौर पर ग्रीनलैंड को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने की बात कर रहा है। यूरोपीय नेताओं ने चिंता तो जताई है, लेकिन एक कथित सहयोगी द्वारा किए गए इस ‘विश्वासघात’ पर अब तक कोई एकजुट और ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आ पाई है।

 

11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद डेनमार्क ने अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान और इराक युद्धों में भाग लिया था। लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, डेनमार्क ने अपनी विदेश नीति पर पुनर्विचार किया और यूरोपीय संघ की साझा सुरक्षा नीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिकी विदेश नीति का दक्षिणपंथी रुख और तीखा हो गया है। इससे डेनमार्क को ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय संघ से समर्थन मांगने पर मजबूर होना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड पर किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप का असर केवल डेनमार्क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था, सुरक्षा ढांचे और वैश्विक संतुलन पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।

 

विश्लेषकों ने इस संकट को समझने के लिए चार दृष्टिकोण सामने रखे हैं यथार्थवाद, नए वैश्विक अभिजात वर्ग का प्रभाव, उदारवादी विश्व व्यवस्था का पतन और ग्रहीय (प्लैनेटरी) राजनीति। अंतिम दृष्टिकोण के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की लूट, निरंकुशता और युद्ध आपस में जुड़े हुए संकट हैं, जिन्हें अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ समझना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड विवाद ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिका अब यूरोप के लिए भरोसेमंद दीर्घकालिक साझेदार नहीं रह गया है।

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