Edited By Parveen Kumar,Updated: 18 Mar, 2026 05:56 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक हलचल ने पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। ऐसे हालात में भारत सरकार ने समय रहते सतर्कता...
नेशनल डेस्क : पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक हलचल ने पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। ऐसे हालात में भारत सरकार ने समय रहते सतर्कता दिखाते हुए एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार करीब 600 करोड़ रुपये का एक विशेष आपात फंड तैयार कर रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत गैस खरीदी जा सके और सप्लाई चेन प्रभावित न हो।
उर्वरक उत्पादन पर नहीं आने दी जाएगी आंच
देश में उर्वरक उत्पादन का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है। यदि गैस की कमी होती है तो इसका सीधा असर खाद उत्पादन और किसानों की जरूरतों पर पड़ सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने यह रणनीतिक फंड तैयार करने का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में फर्टिलाइजर प्लांट्स को गैस की कमी का सामना न करना पड़े और उत्पादन बिना रुकावट जारी रहे।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
मौजूदा हालात में सबसे बड़ा खतरा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा है, जो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का अहम मार्ग माना जाता है। यहां किसी भी तरह की बाधा से गैस की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो गैस सप्लाई में भारी गिरावट आ सकती है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ना तय है।
कीमतों में उछाल से निपटने की तैयारी
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार एशियाई बाजार में एलएनजी की कीमतों में 40 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इस संभावित महंगाई से निपटने के लिए सरकार ने पहले ही रणनीति बना ली है। यह आपात फंड स्पॉट मार्केट से तत्काल गैस खरीदने में मदद करेगा, जिससे आपूर्ति संतुलित बनी रहे और उत्पादन लागत पर अत्यधिक दबाव न पड़े।
खरीफ सीजन से पहले रणनीतिक कदम
भारत में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में गैस की आपूर्ति बाधित होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सरकार इस जोखिम को टालने के लिए पहले से ही तैयारियां कर रही है। देश के लगभग 37 यूरिया प्लांट्स गैस पर आधारित हैं, जिनकी लागत का बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर करता है। इस पहल से इन प्लांट्स को निरंतर संचालन में मदद मिलेगी।
किसानों और आम लोगों को राहत
सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा किसानों और आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। उर्वरक उत्पादन प्रभावित न होने से खेती पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, गैस की कीमतों में संभावित तेजी के बावजूद बाजार को स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी। यह कदम देश की ऊर्जा और कृषि सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।