ईरान में भयावह हालातः सरकार ने कत्लेआम पर कबूला सच ! प्रदर्शनों में 2000 मौतों की पुष्टि की, UN बोला- “भयभीत और स्तब्ध” हैं

Edited By Updated: 13 Jan, 2026 05:26 PM

iran official says 2 000 people have been killed in unrest

ईरान में मुद्रा मूल्य गिरने से भड़के देशव्यापी प्रदर्शनों में अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत की सरकारी स्वीकारोक्ति सामने आई है। यह पिछले कई वर्षों में शासन के लिए सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है, जिसे सुरक्षा बलों ने सख्ती से कुचला।

International Desk: ईरान में जारी भीषण विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। ईरानी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया है कि देशभर में भड़के प्रदर्शनों और सुरक्षा कार्रवाई में करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें आम प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के जवान दोनों शामिल हैं। यह पहली बार है जब ईरानी अधिकारियों ने इतनी बड़ी संख्या में मौतों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। यह विरोध प्रदर्शन ईरानी मुद्रा के बुरी तरह गिरने, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के कारण भड़के। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इसे पिछले कम से कम तीन वर्षों में शासन के लिए सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है । 

 

ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता जताई है। मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने सैकड़ों मौतों पर “भयावह हिंसा” कहा। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों के दौरान “सैकड़ों लोगों की मौत” हो चुकी है और ईरानी नागरिकों के खिलाफ हो रही हिंसा से वह “भयभीत और स्तब्ध” हैं।  तुर्क ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग, गोलीबारी, गिरफ्तारियां और इंटरनेट बंद करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने ईरान से अपील की कि वह तुरंत हिंसा रोके और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करे।

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इसी बीच, ईरान ने अमेरिका को सख्त संदेश दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में कहा, “अगर वॉशिंगटन सैन्य विकल्प को फिर से परखना चाहता है, तो वह पहले भी ऐसा कर चुका है और हम उसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।” अराघची के इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब ईरान के अंदर हालात बेहद अस्थिर हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक संकट, मुद्रा अवमूल्यन और महंगाई ने जनता के गुस्से को भड़का दिया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे विदेशी साजिश बताकर सख्त दमन कर रहा है। UN की यह चेतावनी ईरान पर वैश्विक निगरानी और दबाव को और तेज कर सकती है।

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रॉयटर्स से बातचीत में ईरानी अधिकारी ने मौतों के लिए कथित रूप से “आतंकवादियों” को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि मरने वालों में कितने नागरिक थे और कितने सुरक्षाकर्मी। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सैकड़ों निर्दोष प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और हजारों को गिरफ्तार किया गया है। ईरान के धार्मिक शासन ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर दोहरी नीति अपनाई है। एक ओर आर्थिक समस्याओं पर विरोध को “वैध” बताया गया, वहीं दूसरी ओर कठोर सुरक्षा कार्रवाई, गोलियां, गिरफ्तारियां और इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया गया।

 

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