खाड़ी देश में तैनात होगी सेना, हूती हमलों के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की हुए सहमत

Edited By Updated: 06 Oct, 2026 09:55 AM

pak saudi arabia turkiye agree to deploy forces in gulf country

हूथी हमलों के मद्देनजर, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को लागू करने और खाड़ी देश में "तय सैन्य बल और क्षमताएं उपलब्ध कराने तथा उनकी तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने" पर सहमत हुए हैं। एक संयुक्त बयान के अनुसार सऊदी अरब के सामने...

इस्लामाबाद : हूथी हमलों के मद्देनजर, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को लागू करने और खाड़ी देश में "तय सैन्य बल और क्षमताएं उपलब्ध कराने तथा उनकी तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने" पर सहमत हुए हैं। एक संयुक्त बयान के अनुसार सऊदी अरब के सामने मौजूद क्षेत्रीय घटनाक्रम और खतरों से निपटने के लिए तीनों पक्षों ने सोमवार को रियाद में 'मक्का एलायंस फॉर डिफेंस' की रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति (SPDC) की एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी। 

अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की द्वारा हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय रक्षा समझौता सामूहिक प्रतिरोध के लिए एक ढांचा तैयार करता है और यह तय करता है कि उनमें से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा। SPDC ने सोमवार को बैठक से पहले हुई राजनीतिक और सैन्य चर्चाओं के नतीजों की समीक्षा की और उसे सौंपी गई सिफारिशों को मंजूरी दी। इसने पुष्टि की कि मक्का समझौता सामूहिक रक्षा और खतरों का सामना करने में एकजुट रुख के प्रति एक दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

समिति ने 'सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक रूप से लागू करने की दिशा में तुरंत आगे बढ़ने और तय सैन्य बल व क्षमताएं उपलब्ध कराने तथा किंगडम (सऊदी अरब) में उनकी तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का फैसला किया। बयान में कहा गया, 'तीनों देशों ने पुष्टि की कि प्रत्येक पक्ष की सुरक्षा तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा का एक अभिन्न अंग है।' बयान में सैनिकों की तैनाती के बारे में कोई विवरण या समय-सारणी नहीं दी गई। इसमें विशेष रूप से हूथियों का खतरे के तौर पर नाम नहीं लिया गया, लेकिन यह घटनाक्रम सऊदी अरब पर हूथी हमलों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। 

पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर बैठक में शामिल हुए। ख्वाजा आसिफ ने जियो न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान और तुर्की की "क्षेत्र में उपस्थिति" थी, लेकिन लड़ाकू अभियानों में केवल सऊदी सैनिक ही शामिल थे। उन्होंने कहा, 'उन्हें जो भी मदद चाहिए, वह दी जा रही है। लेकिन अभी तुर्की और पाकिस्तान की सेनाएं मदद करने की भूमिका निभा रही हैं।' उन्होंने बताया कि पाकिस्तान टोह लेने (रेकी) का काम कर रहा है।
तीनों पक्षों ने मक्का और मदीना को निशाना बनाने की कोशिशों, और साथ ही सऊदी अरब के शहरों, आम नागरिकों और आर्थिक ठिकानों पर लगातार हो रहे हमलों की भी कड़े शब्दों में निंदा की। 

बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब के सामने मौजूद खतरों और हमलों का मुकाबला करने में सऊदी सशस्त्र बलों की सतर्कता और तैयारी की सराहना की। गठबंधन के संस्थागत विकास के तहत, समिति ने पाकिस्तान के जनरल नौमान महमूद (रिटायर्ड) को तीन साल के कार्यकाल के लिए पहला महासचिव नियुक्त करने का फैसला किया। SPDC की यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यमन में सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने रविवार को हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस पाने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। 

SPDC मक्का समझौते का एक अहम हिस्सा है और इसमें तीनों सदस्य देशों के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख शामिल होते हैं। पिछले महीने तीनों देशों के रक्षा बलों के प्रमुखों और जनरल स्टाफ के प्रमुखों ने रियाद में मुलाकात की और सुरक्षा स्थिति तथा सऊदी अरब के सामने मौजूद खतरों की समीक्षा की। इसके अलावा पिछले महीने न्यूयॉर्क में UN महासभा से इतर तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भी मुलाकात की और सऊदी अरब के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की थी। 

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