Edited By Tanuja,Updated: 11 Jan, 2026 05:22 PM

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की जनता को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि उनकी आर्थिक परेशानियों के लिए रूस नहीं, बल्कि उनके अपने स्वार्थी और लालची नेता जिम्मेदार हैं। पुतिन ने आरोप लगाया कि पश्चिमी सरकारें जानबूझकर रूस को बलि का बकरा...
International Desk: स्वीडन से सामने आई यह कहानी इंसानी क्रूरता और मानसिक आतंक की हदें पार कर देती है। जेमी ली एरो ने सार्वजनिक रूप से बताया कि जब वह महज 9 साल की थी, तब उसके पिता इसाकिन ड्रैबड ने अपनी प्रेमिका हेले क्रिस्टेंसन की बेरहमी से हत्या कर दी और उसके शव के हिस्से खा लिए। डेली स्टार और LadBible की रिपोर्ट के अनुसार, इसाकिन खुद को शैतान का उपासक मानता था। नवंबर 2010 में उसने हेले का सिर धड़ से अलग किया, चाकू, आरी और कुल्हाड़ी से शरीर के टुकड़े किए और कुछ हिस्सों को पकाकर खाया। उसका इरादा सिर खाने का भी था।
हत्या से पहले हेले ने जेमी से कहा था-“यह आखिरी बार है जब मैं तुम्हारे लिए खाना बना रही हूं, क्योंकि इसाकिन मुझे मार देगा।” ह भविष्यवाणी सच साबित हुई। मामला सामने आने के बाद स्वीडन में सनसनी फैल गई। इसाकिन को दोषी ठहराकर सुरक्षित मनोरोग अस्पताल में रखा गया, जहां वह “पिशाच हत्यारा” के नाम से कुख्यात हुआ। उसने ब्लॉग और यूट्यूब के जरिए अपने अपराधों का बचाव किया, खुद को मानव-विरोधी बताया और खून से साइन की गई वूडू गुड़िया ऑनलाइन बेचने लगा। जेमी का बचपन पूरी तरह बर्बाद हो गया।

स्कूल में उसे “नरभक्षी की बेटी” कहकर तंग किया गया। मानसिक दबाव, सामाजिक नफरत और पिता की जेल मुलाकातों में की गई ब्रेनवॉशिंग ने उसे नशे की लत की ओर धकेल दिया। 15 साल की उम्र तक वह गंभीर रूप से नशे की आदी हो चुकी थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जेमी ने स्वीकार किया कि इस जघन्य अपराध के बावजूद वह अपने पिता से भावनात्मक रूप से पूरी तरह अलग नहीं हो पाई। उसके मुताबिक, “मैं जानती हूं कि उसने क्या किया, वह कितना घिनौना था, लेकिन वह मेरा पिता है। भावनाएं तर्क से अलग चलती हैं।” बाद में, जब जेमी ने पिता को माफ करने की कोशिश की, तो जवाब में उसे एक घिनौना और धमकी भरा संदेश मिला। उसी पल उसे एहसास हुआ कि इस रिश्ते से खुद को पूरी तरह अलग करना ही उसकी मानसिक मुक्ति का रास्ता है। आज जेमी अपनी कहानी इसलिए साझा कर रही हैं ताकि लोग समझ सकें कि अपराध की सजा सिर्फ पीड़ित तक सीमित नहीं रहती, उसकी गूंज अगली पीढ़ी तक जाती है।