ईरान-अमेरिका के बीच संघर्षविराम पर मंडराया खतरा: UAE ने की ड्रोन-मिसाइल हमले की पुष्टि

Edited By Updated: 08 May, 2026 01:06 PM

pressure mounts on us iran ceasefire uae confirms drone missile attack

मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले एक महीने से जारी नाजुक संघर्षविराम (Ceasefire) टूटने की कगार पर है। आज संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की...

इंटरनेशनल डेस्क। मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले एक महीने से जारी नाजुक संघर्षविराम (Ceasefire) टूटने की कगार पर है। आज संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि की है जिससे क्षेत्र में युद्ध की आहट फिर से तेज हो गई है। 

इससे कुछ घंटे पहले अमेरिका ने कहा था कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के तीन जहाजों पर हुए हमलों को विफल कर दिया और जवाबी कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ताजा हिंसा से ईरान और अमेरिका के बीच लागू संघर्षविराम पर संकट गहरा गया है जबकि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने के लिए संभावित समझौते पर विचार कर रहे हैं। तेहरान ने बीते दिन कहा था कि वह युद्ध समाप्त करने संबंधी अमेरिका के ताजा प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान की ओर से भेजे गए संदेशों की समीक्षा कर रहा है। पाकिस्तान शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। 

ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार हालांकि ईरान अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है और उसने अमेरिकी पक्ष को कोई जवाब नहीं दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से युद्ध समाप्त करने की रणनीति को लेकर मिले-जुले संकेत दिए गए हैं। पहले संघर्षविराम और सैन्य अभियान समाप्त होने की घोषणाओं के बाद अब तेहरान को यह चेतावनी दी जा रही है कि यदि उसने ऐसा समझौता स्वीकार नहीं किया जिससे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति फिर शुरू हो सके, तो उस पर दोबारा बमबारी की जा सकती है। 

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बीते दिन ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना से जुड़े घटनाक्रम के बाद इन चेतावनियों को दोहराया। उन्होंने वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा, उन्हें समझना होगा कि यदि समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ईरान के साथ समझौते की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, यह किसी भी दिन हो सकता है, हालांकि उन्होंने तुरंत जोड़ा और यह नहीं भी हो सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच चार अप्रैल से संघर्षविराम है। 

दोनों देशों के बीच पिछले महीने पाकिस्तान की मेजबानी में हुई प्रत्यक्ष वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। यह युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद शुरू हुआ था। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने लोगों को सलाह दी कि वे हवा में ड्रोन मिसाइल हमले रोकने के दौरान गिरे किसी भी मलबे या टुकड़े के पास न जाएं उसकी तस्वीर न लें और उसे न छुएं। 

इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने कहा था कि उसने बीती रात होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के तीन जहाजों पर हुए ईरानी हमलों को विफल कर दिया और अमेरिकी बलों पर हमले के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी बलों ने उकसावे के बिना किए गए ईरानी हमलों को रोका और आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। 

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अमेरिकी सेना ने कहा कि किसी भी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा और उसका तनाव बढ़ाने का इरादा नहीं है, लेकिन वह अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने कहा कि ताजा हिंसा के बावजूद संघर्षविराम कायम है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बृहस्पतिवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की। 

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, हमें उम्मीद है कि समझौता जल्द होगा। हम आशा करते हैं कि पक्ष शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान तक पहुंचेंगे, जिससे न केवल हमारे क्षेत्र बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति को भी मजबूती मिलेगी। हालांकि उन्होंने कोई समयसीमा बताने से इनकार किया। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने टीवी पर प्रसारित बयान में कहा कि इस्लामाबाद युद्ध रोकने और युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए ईरान और अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है। अमेरिका के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि इजराइल और लेबनान के बीच प्रत्यक्ष वार्ता अगले सप्ताह वाशिंगटन में 14 और 15 मई को होगी। 

इस बीच एक शिपिंग डेटा कंपनी ने बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की जांच और उन पर शुल्क लगाने के लिए एक सरकारी एजेंसी बनाई है। जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को औपचारिक रूप देने की ईरानी कोशिश से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। 

फारस की खाड़ी में सैकड़ों वाणिज्यिक जहाज फंसे हुए हैं और खुले समुद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। हालांकि, दो महीने से जारी संघर्ष जल्द समाप्त होने की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कुछ राहत देखी गई। शिपिंग डेटा कंपनी 'लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस' ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अनुमति देने और उनसे शुल्क वसूलने के लिए नई एजेंसी बनाई है। 

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इससे वैश्विक व्यापार के लिए जरूरी समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ी है। 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' नामक यह एजेंसी ''जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अनुमति देने वाली एकमात्र वैध संस्था'' के रूप में खुद को स्थापित कर रही है। लॉयड्स ने कहा कि एजेंसी ने जहाजों के लिए आवेदन पत्र भी भेजा है। ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर रखा है जो तेल, गैस, उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। 

वहीं, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है। इससे ईंधन कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। ईरान का उद्देश्य यह नियंत्रित करना है कि कौन से जहाज जलडमरूमध्य से गुजरेंगे और कुछ जहाजों के माल पर कर लगाया जाएगा। समुद्री कानून विशेषज्ञों का कहना है कि जहाजों की जांच और उन पर कर लगाने की ईरान की मांग अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। 

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के तहत देशों को अपने क्षेत्रीय जल से शांतिपूर्ण आवाजाही की अनुमति देनी होती है। अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें ईरान द्वारा जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की निंदा की जाएगी और प्रतिबंधों की चेतावनी दी जाएगी। इससे पहले जलडमरूमध्य को फिर खोलने संबंधी प्रस्ताव को रूस और चीन ने वीटो कर दिया था। 

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