Edited By Tanuja,Updated: 28 Mar, 2026 06:47 PM

तिब्बत की निर्वासित सरकार को आज तक किसी देश ने आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इसकी वजह चीन का वैश्विक दबदबा और आर्थिक ताकत है। इसके बावजूद Dalai Lama का नैतिक प्रभाव दुनिया भर में कायम है।
International Desk: एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तिब्बत की निर्वासित सरकार Central Tibetan Administration को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता न मिलने की सबसे बड़ी वजह चीन की आर्थिक और कूटनीतिक ताकत है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति इसलिए नहीं है कि तिब्बत के पास वैध दावा नहीं है, बल्कि इसलिए है कि चीन के खिलाफ खड़े होने की कीमत बहुत अधिक है। दुनिया के अधिकांश देश बीजिंग के आर्थिक प्रभाव और राजनीतिक दबाव के कारण इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आते।
विश्लेषण में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में “मान्यता” संप्रभुता की सबसे बड़ी पहचान होती है, लेकिन आज तक किसी भी देश ने तिब्बती प्रशासन को आधिकारिक सरकार के रूप में स्वीकार नहीं किया। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी बताया गया है कि चीन का United Nations Security Council में स्थायी सदस्य होना है, जिससे उसकी वैश्विक ताकत और बढ़ जाती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इतिहास में निर्वासित सरकारों को मान्यता मिलती रही है, जैसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड या 1990 में कुवैत की सरकार।
लेकिन तिब्बत के मामले में चीन का मजबूत नियंत्रण और वैश्विक प्रभाव इस संभावना को लगभग खत्म कर देता है। हालांकि, इस राजनीतिक स्थिति के बीच Dalai Lama एक अलग पहचान रखते हैं। उन्हें दुनिया भर में एक आध्यात्मिक नेता, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और अहिंसा के प्रतीक के रूप में सम्मान मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार, यही कारण है कि कई देश तिब्बत के सांस्कृतिक और मानवीय मुद्दों का समर्थन तो करते हैं, लेकिन आधिकारिक राजनीतिक मान्यता देने से बचते हैं, ताकि चीन की प्रतिक्रिया से बचा जा सके।