उपराष्ट्रपति वेंस का दावाः इस्लामाबाद वार्ता में प्रगति हुई, गेंद अब ईरान के पाले में

Edited By Updated: 14 Apr, 2026 11:07 AM

jd vance says the ball is  in iran s court  after pakistan peace talks stall

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में प्रगति हुई, लेकिन समझौता नहीं हो सका। अब आगे बढ़ने की जिम्मेदारी ईरान पर है। मुख्य विवाद परमाणु ईंधन संवर्धन को लेकर रहा।

Washington: अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा है कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी शांति वार्ता में कुछ प्रगति जरूर हुई, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हो पाया है। उन्होंने साफ कहा कि अब बातचीत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ईरान की है। यह वार्ता करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने परमाणु ईंधन संवर्धन रोकने की शर्त को मानने से इनकार कर दिया, जिससे समझौते में रुकावट आई।


वेंस ने एक इंटरव्यू में कहा कि हालात पूरी तरह खराब नहीं हुए हैं, बल्कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ईरान कुछ हद तक अमेरिका की बातों की ओर बढ़ा, लेकिन अभी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर ने किया, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल थे। यह पहली बार था जब दोनों देशों के बीच इतने उच्च स्तर पर सीधी बातचीत हुई। वेंस ने कहा कि अगर ईरान अमेरिका की “सीमाओं” को मान लेता है, खासकर परमाणु कार्यक्रम को लेकर, तो दोनों देशों के बीच एक अच्छा समझौता हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों।

 

उन्होंने कहा कि बातचीत इसलिए रुक गई क्योंकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अंतिम फैसले के लिए तेहरान में उच्च नेतृत्व से मंजूरी लेनी थी। इससे यह भी साफ हुआ कि वहां अंतिम निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के रुख का समर्थन करते हुए वेंस ने कहा कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने से पूरी दुनिया के लिए खतरा बढ़ जाएगा। ऊर्जा संकट पर बात करते हुए वेंस ने माना कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोग परेशान हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार कोशिश कर रहा है कि बातचीत के जरिए हालात सामान्य किए जाएं और ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित किया जाए।
 

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