Edited By Tanuja,Updated: 19 Apr, 2026 05:06 PM

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन (Masoud Pezeshkian) ने डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर तीखा हमला करते हुए परमाणु कार्यक्रम में दखल को अवैध बताया। Iran-अमेरिका टकराव बढ़ रहा है, जिससे Strait of Hormuz और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ा है।
International Desk: ईरान (Iran) और अमेरिका (United States) के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन (Masoud Pezeshkian) ने अमेरिकी नीति पर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को निशाना बनाते हुए कहा कि अमेरिका को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों का इस्तेमाल करे या नहीं। उन्होंने सवाल किया, “ट्रंप कौन होते हैं किसी देश को उसके अधिकारों से वंचित करने वाले?” ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका बिना किसी ठोस कारण के ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है, जो पूरी तरह से गलत और अवैध है।
उन्होंने साफ किया कि ईरान अपने “तकनीकी और संप्रभु अधिकारों” से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब भी कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। खासतौर पर परमाणु गतिविधियों की निगरानी और सीमा को लेकर दोनों पक्षों में गहरा मतभेद बना हुआ है।हालांकि, बातचीत पूरी तरह रुकी नहीं है। दोनों देशों के अधिकारियों ने माना है कि हाल की चर्चाओं से कुछ मतभेद कम हुए हैं, लेकिन अभी भी कई अहम मुद्दे अनसुलझे हैं। Donald Trump ने भी बातचीत को “अच्छा” बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि किसी भी तरह का “ब्लैकमेल” स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस पूरे विवाद का असर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को भी हिला दिया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। हॉर्मुज़ में तनाव बढ़ने और आंशिक बंदी जैसी स्थिति बनने के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके अलावा, क्षेत्र में जारी संघर्ष अब आठवें सप्ताह में पहुंच चुका है और इसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इजराइल-लेबनान तक फैले इस संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है।