दूषित पानी से अब तक 17 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती... उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए

Edited By Updated: 06 Jan, 2026 12:17 AM

17 people have died and 100 have been hospitalized

इंदौर के भगीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में दूषित पेयजल से जुड़े उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सोमवार को सामने आए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दूषित पेयजल कांड में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि छह मरीजों को...

नेशनल डेस्क: इंदौर के भगीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में दूषित पेयजल से जुड़े उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सोमवार को सामने आए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दूषित पेयजल कांड में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि छह मरीजों को उपचार के लिए अस्पतालों में रेफर किया गया है, जबकि 110 मरीजों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें से 15 मरीजों को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया है। इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक सात मौतें दर्ज की गई हैं। इससे एक दिन पहले तक अधिकारी छह मौतों की पुष्टि कर रहे थे। हालांकि, स्थानीय लोगों ने इस बीमारी से 17 लोगों की मौत का दावा किया है।

इस बीच, स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति का आकलन करने और प्रभावित क्षेत्र में क्लोरीनयुक्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भगीरथपुरा इलाके में ‘कोबो टूल' के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के लिए केंद्र सरकार के क्षेत्रीय स्वास्थ्य निदेशक डॉ. चंद्रशेखर गेडाम द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से प्रशिक्षण दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि यह टूल क्षेत्र की स्थिति का रियल-टाइम आकलन करने में सहायक है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी के निर्देश पर क्षेत्र में करीब 200 टीमों को तैनात किया गया। प्रत्येक टीम ने पूर्व-चिह्नित घरों का दौरा कर सर्वेक्षण किया।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्रत्येक परिवार को ओआरएस के 10 पैकेट, जिंक की 30 गोलियां और एक ‘क्लीन वॉटर ड्रॉपर' वितरित किया गया। निवासियों को 10 लीटर पानी में आठ से 10 बूंदें ‘क्लीन वॉटर' द्रव डालकर एक घंटे बाद उपयोग करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने लोगों को परामर्श दिया, टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर साझा किए और दवाइयों का पूरा कोर्स लेने, पीने का पानी उबालने तथा हाथ धोने की सही विधि पर जोर दिया। प्रत्येक टीम में एक डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, आशा कार्यकर्ता और एएनएम शामिल थे। टीमें दिनभर में 2,745 घर गईं। अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रभावित क्षेत्र में क्लोरीनयुक्त और कीटाणु-मुक्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

जिलाधिकारी शिवम वर्मा के निर्देश पर क्षेत्र में पांच एंबुलेंस तैनात की गई हैं और डॉक्टरों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। मरीजों को एमवाय अस्पताल और अरबिंदो अस्पताल में रेफर किया जा रहा है, जबकि प्रभावित बच्चों को चाचा नेहरू बाल अस्पताल भेजा जा रहा है। बयान में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को भी मुफ्त उपचार, जांच और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। 

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