BJP Suspends 4 Leaders: BJP की सर्जिकल स्ट्राइक से मचा हड़कंप: पार्टी ने इन 4 नेताओं को निकाला

Edited By Updated: 27 Oct, 2025 11:55 AM

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अनुशासनहीनता का बम फट पड़ा है। पार्टी ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर यह साफ कर दिया है कि NDA के साझा उम्मीदवारों के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा...

नेशनल डेस्क:  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अनुशासनहीनता का बम फट पड़ा है। पार्टी ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर यह साफ कर दिया है कि NDA के साझा उम्मीदवारों के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। चुनावी मौसम में यह कार्रवाई बीजेपी के अंदर बढ़ती असंतोष की आवाज़ों को शांत करने की रणनीति मानी जा रही है।

पार्टी लाइन से हटे, तो हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, जिन चार नेताओं पर गाज गिरी है, उनमें वरुण सिंह, अनूप कुमार, पवन यादव और सूर्य भान सिंह शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये चारों नेता NDA समर्थित उम्मीदवारों के विरुद्ध अलग-अलग सीटों से स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए थे। पार्टी नेतृत्व ने इसे सीधी अवज्ञा मानते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है।

कहां-कहां से थे उम्मीदवार
वरुण सिंह बहादुरगंज, अनूप कुमार गोपालगंज, पवन यादव कहलगांव और सूर्य भान सिंह बड़हरा विधानसभा सीट से चुनावी अखाड़े में थे। इन चारों पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के फैसले और अनुशासन का उल्लंघन करते हुए गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोंकी।

JDU ने भी की सख्ती
इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यू) ने भी बागी सुर अपनाने वाले 16 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया था। पार्टी के प्रदेश महासचिव चंदन कुमार सिंह ने उनके निष्कासन की घोषणा की थी। JDU का कहना था कि गठबंधन के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ना या संगठन को कमजोर करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

कौन-कौन हुए बाहर
जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई, उनमें कई पूर्व विधायक, मंत्री और एमएलसी शामिल हैं — जैसे मुंगेर के पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, सीवान के श्याम बहादुर सिंह, भोजपुर के रणविजय सिंह, शेखपुरा के सुदर्शन कुमार, और गोपालपुर के विधायक नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल आदि। इन सभी को पार्टी से बाहर कर गठबंधन में एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है।

चुनावी रणनीति पर बड़ा असर
बीजेपी और जेडीयू दोनों की यह सख्ती इस बात का संकेत है कि NDA इस बार बगावती सुरों को किसी भी कीमत पर दबाना चाहता है। अमित शाह के हालिया बिहार दौरे के बाद यह स्पष्ट है कि पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करने और विरोधी खेमे को एकजुटता का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।

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