Edited By Parveen Kumar,Updated: 17 Mar, 2026 12:27 AM

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अब सिर्फ घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रह गया है। गैस की कमी के कारण आम लोगों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और कई इलाकों में रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। खास तौर पर झुग्गी बस्तियों...
नेशनल डेस्क : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अब सिर्फ घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रह गया है। गैस की कमी के कारण आम लोगों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और कई इलाकों में रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। खास तौर पर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवार इस संकट से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं। दक्षिण दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में स्थित नवजीवन कैंप में कई घरों में सिलेंडर न मिलने के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है।
ब्लैक मार्केट में कई गुना महंगा बिक रहा सिलेंडर
स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस की कमी का फायदा उठाकर कुछ लोग सिलेंडर ब्लैक में बेच रहे हैं। जहां पहले घरेलू गैस सिलेंडर करीब 900 रुपये में मिल जाता था, वहीं अब इसे करीब 4,000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इसी तरह खुले में मिलने वाली एलपीजी की कीमत भी काफी बढ़ गई है, जो पहले लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम मिलती थी, वह अब करीब 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
मजबूरी में लकड़ी और अन्य साधनों का सहारा
गैस की कमी के चलते कई परिवारों को मजबूर होकर ब्लैक मार्केट से महंगे दाम पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। वहीं कुछ लोगों ने खाना पकाने के लिए लकड़ी और दूसरे पारंपरिक साधनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
सिलेंडर की कमी से रोजगार भी प्रभावित
नवजीवन कैंप में रहने वाले एक डिलीवरी बॉय ने बताया कि घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडरों की कमी से उसका काम भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि सिलेंडर बुकिंग की अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है, लेकिन इसके बावजूद समय पर गैस नहीं मिल रही। कई बार बुकिंग करने के बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है।
खुले में मिलने वाली गैस भी महंगी
करीब चार दशक से इलाके में रह रही एक महिला ने बताया कि अब कई लोग छोटे सिलेंडर या ढीली एलपीजी खरीदने के लिए मजबूर हैं। पहले यह गैस लगभग 100 रुपये प्रति किलो में मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कीमत करीब 400 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसके अलावा एक बार में सीमित मात्रा में ही गैस दी जा रही है।
महंगाई से बढ़ी परिवारों की चिंता
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि कई परिवारों में सदस्यों की संख्या ज्यादा है, ऐसे में 4,000 रुपये तक का सिलेंडर खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है। कई घरों में अब लकड़ी जलाकर खाना बनाया जा रहा है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।
गैस एजेंसियों पर लोगों की नाराजगी
इलाके के लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसियां उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूर हैं, जिनकी आमदनी सीमित है और उन्हें किराया भी देना पड़ता है। ऐसे में एलपीजी की कमी ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया है।
मुंबई में भी बढ़ा खाना बनाने का खर्च
उधर मुंबई में भी कमर्शियल गैस की कमी के कारण होटल और छोटे दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गैस की उपलब्धता कम होने के कारण कई दुकानदारों ने खाना पकाने के लिए कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। कुछ व्यापारियों ने बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल दिया है, जबकि कई लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह संकट जल्द खत्म होगा। एक दुकानदार ने हालात को ‘कोरोना काल से भी ज्यादा मुश्किल’ बताया।