Edited By Pardeep,Updated: 29 Sep, 2026 11:37 PM

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण आने वाले महीनों में एक 'बड़े खाद्यान्न संकट' (Major Food Crisis) के गहराने की चेतावनी दी है। सोमवार को 'एशिया सोसाइटी' (Asia Society) में बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा कि...
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण आने वाले महीनों में एक 'बड़े खाद्यान्न संकट' (Major Food Crisis) के गहराने की चेतावनी दी है। सोमवार को 'एशिया सोसाइटी' (Asia Society) में बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा कि इन भू-राजनीतिक तनावों से 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की अर्थव्यवस्थाओं पर बहुत भारी और तनावपूर्ण असर पड़ रहा है।
ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा तबाही भरा असर
विदेश मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि यूक्रेन और ईरान-खाड़ी (पश्चिम एशिया) संघर्षों का विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर विनाशकारी प्रभाव हुआ है। ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं इस समय भौतिक असुरक्षा और कूटनीतिक दांव-पेच दोनों के दोहरे दबाव में हैं। उन्होंने सचेत किया कि बाजार की तंग स्थिति के समय राजनीतिक हस्तक्षेप से ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जबकि इस समय स्थिरता लाना बेहद जरूरी है।
तेल आपूर्ति पर राजनीति से गहराया दोहरा संकट
जयशंकर ने समझाया कि तेल आपूर्ति की सुरक्षा और तेल की राजनीति एक-दूसरे को प्रभावित कर दोहरा संकट पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग इस पर राजनीति करते हैं, तो इससे बाजार में जटिलताएं और बढ़ जाती हैं।
काला सागर से अनाज का निर्यात ठप
कृषि इनपुट और अनाज की ढुलाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि समुद्री मार्गों के बाधित होने और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के प्रभावित होने से अनाज की सप्लाई रुक रही है। उन्होंने बताया कि आज ऐसी स्थिति बन गई है कि कुछ प्रमुख अनाज निर्यातक देश, विशेष रूप से काला सागर (Black Sea) के रास्ते, अपने जहाजों और खेपों को बाहर नहीं भेज पा रहे हैं।
उर्वरक की भारी किल्लत और जलवायु परिवर्तन का खतरा
जयशंकर ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया और रूस में प्रमुख उत्पादक स्थित होने के कारण वैश्विक उर्वरक (खाद) उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही, मौसम और जलवायु परिवर्तन के गंभीर दुष्प्रभावों ने मिलकर वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।