Aadhar Card Rules: कौन नहीं बना सकता आधार कार्ड? जानें जरूरी जानकारी

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 11:57 AM

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आधार कार्ड आज के डिजिटल युग में केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हर भारतीय की पहचान का आधार स्तंभ बन चुका है। सरकारी सब्सिडी से लेकर बैंक खाता खुलवाने तक, हर जगह इसकी अनिवार्यता ने इसे 'सुपर आईडी' बना दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह 12 अंकों का...

नेशनल डेस्क: आधार कार्ड आज के डिजिटल युग में केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हर भारतीय की पहचान का आधार स्तंभ बन चुका है। सरकारी सब्सिडी से लेकर बैंक खाता खुलवाने तक, हर जगह इसकी अनिवार्यता ने इसे 'सुपर आईडी' बना दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह 12 अंकों का जादुई नंबर हर किसी के नसीब में नहीं होता? भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के नियम बेहद सख्त हैं और कुछ खास श्रेणियों के लोग चाहकर भी आधार के लिए आवेदन नहीं कर सकते।

आधार कार्ड की 'नो-एंट्री' लिस्ट: किनके आवेदन हो जाते हैं खारिज
आधार कार्ड मुख्य रूप से भारत के निवासियों के लिए है, न कि हर उस व्यक्ति के लिए जो देश की सीमा के भीतर मौजूद है। विदेशी नागरिक सीधे तौर पर आधार के लिए पात्र नहीं होते; इसके लिए निवासी होने की अनिवार्य शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। इसके अलावा, अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में घुसपैठ करने वाले लोगों के लिए आधार के दरवाजे पूरी तरह बंद हैं। नियमों के मुताबिक, किसी मृत व्यक्ति के नाम पर आधार बनवाना न केवल असंभव है, बल्कि गैर-कानूनी भी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी के जरिए सिस्टम को चकमा देने की कोशिश करता है, तो उसका आवेदन तुरंत रद्द कर दिया जाता है और उसे कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।

बायोमेट्रिक से लेकर पोस्ट ऑफिस तक: कैसे तैयार होता है आपका आधार
आधार बनवाने की प्रक्रिया तकनीकी और सुरक्षा के लिहाज से बेहद जटिल है। इसकी शुरुआत नजदीकी नामांकन केंद्र से होती है, जहाँ आवेदक को अपनी पहचान (POI), पते (POA) और जन्मतिथि के वैध दस्तावेज जमा करने होते हैं। यहाँ केवल कागजी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि आपके शरीर की अनूठी पहचान भी दर्ज की जाती है, जिसमें उंगलियों के निशान (Fingerprints), आंखों की पुतलियों का स्कैन (Iris Scan) और एक लाइव फोटो शामिल है। बच्चों के मामले में माता-पिता के आधार और जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाया जाता है। प्रक्रिया पूरी होने पर एक 'एनरोलमेंट स्लिप' दी जाती है, जिसमें मौजूद EID नंबर से आप घर बैठे अपने आवेदन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।

सख्त जांच का चक्रव्यूह: क्यों नहीं मिलती सबको मंजूरी
डेटा जमा होने के बाद असली काम शुरू होता है 'सेंट्रल आईडी रिपॉजिटरी' में। यहां आपके डेटा का मिलान पहले से मौजूद करोड़ों लोगों के डेटा से किया जाता है ताकि कोई डुप्लीकेट आधार न बन सके। ऑटोमेटेड एल्गोरिदम और मैनुअल क्वालिटी चेक के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि दी गई जानकारी 100% सही है। अगर सिस्टम को जरा सा भी संदेह होता है या बायोमेट्रिक्स किसी और से मेल खाते हैं, तो आवेदन को तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाता है। जब हर स्तर पर हरी झंडी मिल जाती है, तभी वह विशिष्ट 12 अंकों का नंबर जनरेट होता है। अंत में, प्रिंटिंग पार्टनर और इंडिया पोस्ट के तालमेल से यह कार्ड सुरक्षित तरीके से सीधे आपके घर के पते पर पहुंचता है।
 

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