Edited By Radhika,Updated: 30 Jan, 2026 12:55 PM

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में दुखद निधन के बाद राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। इस रिक्तता को भरने और गठबंधन सरकार में अपनी ताकत बनाए रखने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अब पूरी तरह सक्रिय हो गई...
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में दुखद निधन के बाद राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। इस रिक्तता को भरने और गठबंधन सरकार में अपनी ताकत बनाए रखने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अब पूरी तरह सक्रिय हो गई है। बृहस्पतिवार की रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास 'वर्षा' पर एनसीपी के दिग्गज नेताओं प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने लंबी बैठक की।
मंत्रालयों पर कब्जे की जंग?
अजित पवार केवल पार्टी के चेहरे नहीं थे, बल्कि उनके पास वित्त, राज्य उत्पाद शुल्क और खेल जैसे बेहद प्रभावशाली मंत्रालय थे। एनसीपी नेतृत्व की चिंता यह है कि यदि ये विभाग किसी और दल (बीजेपी या शिवसेना-शिंदे गुट) के पास चले जाते हैं, तो महायुति गठबंधन में पार्टी का पलड़ा कमजोर हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक एनसीपी जल्द ही मुख्यमंत्री को एक औपचारिक पत्र सौंपकर मांग करेगी कि ये सभी विभाग 'एनसीपी कोटे' में ही रखे जाएं।
'वर्षा' बंगले पर क्या हुई चर्चा?
आधी रात तक चली इस बैठक में प्रशासनिक निरंतरता और पार्टी के भविष्य पर गहन चर्चा हुई। छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि शक्ति संतुलन (Power Balance) बनाए रखने के लिए अजित दादा के विभागों का प्रभार एनसीपी के ही किसी वरिष्ठ मंत्री को सौंपा जाए। चर्चा इस बात पर भी है कि क्या सुनेत्रा पवार को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये विभाग?
वित्त और उत्पाद शुल्क विभाग सीधे तौर पर राज्य के खजाने और राजस्व से जुड़े होते हैं। इन पर नियंत्रण रखने वाला दल सरकार की नीतियों और विकास कार्यों में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। फिलहाल मुख्यमंत्री इन विभागों की कमान अस्थायी रूप से अपने पास रख सकते हैं, लेकिन एनसीपी इसे स्थायी रूप से अपने पास ही रखना चाहती है।