‘मुझे लड़की बनना है…’, हर साल सैंकड़ों युवक चेंज करा रहे अपना जेंडर, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

Edited By Updated: 29 Jan, 2026 09:31 PM

aiims delhi s transgender clinic has become a center for those seeking identity

दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) का ट्रांसजेंडर हेल्थ क्लिनिक अब सिर्फ एक इलाज केंद्र नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की जगह बनता जा रहा है जो अपनी असल जेंडर पहचान के साथ जीना चाहते हैं। अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि यहां हर साल सैकड़ों नए लोग पहुंच...

नेशनल डेस्क: दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) का ट्रांसजेंडर हेल्थ क्लिनिक अब सिर्फ एक इलाज केंद्र नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की जगह बनता जा रहा है जो अपनी असल जेंडर पहचान के साथ जीना चाहते हैं। अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि यहां हर साल सैकड़ों नए लोग पहुंच रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं की है।

डॉक्टरों के मुताबिक, हर साल करीब 300 नए मरीज क्लिनिक में रजिस्टर होते हैं, जबकि लगभग 600 लोग नियमित फॉलो-अप और इलाज के लिए आते हैं। ये वे लोग हैं जिन्हें बचपन या किशोरावस्था में एहसास हुआ कि उनका मानसिक और भावनात्मक जेंडर उनके जैविक शरीर से मेल नहीं खाता।

इलाज की शुरुआत शरीर से नहीं, हार्मोन से

एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ बताते हैं कि जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया सीधे सर्जरी से शुरू नहीं होती। सबसे पहले मरीज को हार्मोन थेरेपी दी जाती है- 

  • महिला से पुरुष बनने की प्रक्रिया में पुरुष हार्मोन दिए जाते हैं।
  • पुरुष से महिला बनने पर महिला हार्मोन की मदद ली जाती है।

इन हार्मोन्स से धीरे-धीरे आवाज, चेहरे के बाल, शरीर की बनावट और अन्य शारीरिक लक्षण बदलते हैं। एम्स की खास बात यह है कि हार्मोन थेरेपी, मानसिक स्वास्थ्य जांच और सर्जरी- all-in-one सिस्टम के तहत एक ही जगह उपलब्ध हैं।

सर्जरी से पहले मानसिक मजबूती की कड़ी परीक्षा

एम्स में जेंडर ट्रांजिशन को सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रक्रिया माना जाता है। साइकेट्री विभाग के अनुसार, किसी भी मरीज को सर्जरी की मंजूरी देने से पहले- कम से कम एक साल तक लगातार निगरानी की जाती है। व्यक्ति को उसी जेंडर के रूप में सामाजिक जीवन जीना होता है, जिससे वह खुद को जोड़ता है। जब विशेषज्ञों को यह भरोसा हो जाता है कि मरीज की पहचान स्थिर है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार है, तभी सर्जरी के लिए आधिकारिक सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया तय मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत होती है।

महंगी सर्जरी अब मुफ्त इलाज के दायरे में

जेंडर ट्रांजिशन का अंतिम चरण प्लास्टिक सर्जरी होता है, जिसमें- चेस्ट सर्जरी और जटिल जननांग पुनर्निर्माण, जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, ये सर्जरी कई चरणों में की जाती हैं और सामान्य तौर पर बेहद महंगी होती हैं। लेकिन अब आयुष्मान भारत योजना के तहत ये प्रक्रियाएं कवर की जा रही हैं, जिससे ट्रांसजेंडर समुदाय पर आर्थिक दबाव काफी हद तक कम हुआ है।

एम्स बना समावेशी हेल्थकेयर का मॉडल

एम्स दिल्ली धीरे-धीरे देश के उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल हो रहा है, जहां संवेदनशील, वैज्ञानिक और गरिमापूर्ण ट्रांसजेंडर हेल्थकेयर उपलब्ध है। यहां आने वाले मरीजों के लिए यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि-

  • अपनी पहचान को स्वीकार करने
  • समाज में सम्मान के साथ जीने
  • और नए जीवन की शुरुआत

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