Edited By Anu Malhotra,Updated: 10 Jun, 2026 07:53 AM

चंडीगढ़ से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI1879) में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक सिरफिरे यात्री ने हवा में ही विमान की खिड़की के अंदरूनी हिस्से (पैनल) को तोड़ दिया। क्रू मेंबर्स के बार-बार मना करने के बाद भी यात्री नहीं माना। दिल्ली एयरपोर्ट...
नई दिल्ली: चंडीगढ़ से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI1879) में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक सिरफिरे यात्री ने हवा में ही विमान की खिड़की के अंदरूनी हिस्से (पैनल) को तोड़ दिया। क्रू मेंबर्स के बार-बार मना करने के बाद भी यात्री नहीं माना। दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद आरोपी यात्री को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया, जहां उसने पुलिस की कस्टडी से भागने की भी नाकाम कोशिश की। एयर इंडिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 'नो-फ्लाई लिस्ट' (No-Fly List) में डालने के लिए अपनी आंतरिक समिति को सौंप दिया है।
लैंडिंग से ठीक पहले किया हमला
यह पूरी घटना 7 जून की शाम की है. विमान दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर लैंड करने ही वाला था कि अचानक एक यात्री विमान की खिड़की के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाने लगा। केबिन क्रू ने उसे कई बार चेतावनी दी और रोकने की कोशिश की, लेकिन यात्री का आक्रामक व्यवहार जारी रहा।
क्या होती है अंदरूनी खिड़की?
जिस हिस्से को यात्री ने नुकसान पहुंचाया, उसे तकनीकी भाषा में 'स्क्रैच पेन' कहा जाता है. यह प्लास्टिक की एक सुरक्षात्मक परत होती है, जो मुख्य खिड़की को सुरक्षित रखती है. हालांकि इससे विमान की संरचना या सुरक्षा को कोई खतरा नहीं हुआ, लेकिन एविएशन नियमों के तहत इसे एक गंभीर अपराध माना जाता है.
एयरपोर्ट पर माफीनामा
दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग के बाद जब यात्री को सुरक्षाकर्मियों को सौंपा गया, तो वह अपनी गलती के लिए माफी मांगने लगा. लेकिन उसका ड्रामा यहीं खत्म नहीं हुआ 8 जून की सुबह पुलिस की हिरासत में रात बिताने के बाद, सुबह करीब 9:30 बजे आरोपी यात्री टर्मिनल-3 के चेक-इन एरिया से भागने लगा। उसे भागता देख केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के जवान ने मुस्तैदी दिखाई और दौड़कर उसे दबोच लिया।
एयरलाइन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि उड़ानों में यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे अनुशासनहीन व्यवहार के खिलाफ कंपनी की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति है। डीजीसीए (DGCA) के नियमों के मुताबिक, अब एयरलाइन की इंटरनल कमेटी 30 दिनों के अंदर इस मामले की जांच करेगी। कमेटी तय करेगी कि यात्री को कितनी अवधि के लिए 'नो-फ्लाई लिस्ट' में डाला जाए।
परिजनों ने बताया मानसिक रूप से बीमार
पूछताछ के दौरान यात्री के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा मानसिक बीमारी से जूझ रहा है। उन्होंने उसे पटना ले जाने के लिए एयर इंडिया से टिकट देने की गुहार लगाई, लेकिन एयरलाइन ने जांच का हवाला देते हुए उसे फ्लाइट में बिठाने से साफ इनकार कर दिया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद यात्री को उसके माता-पिता के हवाले कर दिया गया है।