Edited By Ramanjot,Updated: 20 Jan, 2026 05:31 PM

भारत की सुरक्षा व्यवस्था का जब भी जिक्र होता है, अजीत कुमार डोभाल का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे डोभाल आज 81 वर्ष के हो चुके हैं
नेशनल डेस्क: भारत की सुरक्षा व्यवस्था का जब भी जिक्र होता है, अजीत कुमार डोभाल का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे डोभाल आज 81 वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन उनकी रणनीतिक सोच और सुरक्षा मामलों पर पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत मानी जाती है। जासूसी, अंडरकवर ऑपरेशंस और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा उनका जीवन किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा। यही वजह है कि उन्हें “India’s James Bond” भी कहा जाता है।
भारत के इतिहास का सबसे लंबा कार्यकाल
अजीत डोभाल 31 मई 2014 से भारत के National Security Advisor (NSA) हैं। वे लगातार तीसरे कार्यकाल में इस पद पर बने हुए हैं, जो अब तक किसी भी NSA का सबसे लंबा कार्यकाल माना जाता है। 2019 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया, जिससे उनकी भूमिका और प्रभाव और मजबूत हुआ।
आर्मी परिवार से लेकर IPS तक का सफर
डोभाल के पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हेमवती नंदन बहुगुणा की चचेरी बहन थीं।
- मिलिट्री स्कूल से शुरुआती पढ़ाई
- आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में डिग्री
- 1968 में केरल कैडर से IPS बने
उनकी पहली पोस्टिंग कोट्टायम में हुई और बाद में थालास्सेरी में ASP बनाए गए, जहां उन्होंने पहली बार अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया।
दंगे रोककर बने स्टार अफसर
थालास्सेरी में तैनाती के दौरान हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़क चुके थे। डोभाल ने पहले ग्राउंड इंटेलिजेंस जुटाई, लोगों से बात की और गुस्से की असली वजह को समझा।
उन्होंने दंगों के दौरान लूटे गए सामान को वापस दिलवाया और सिर्फ एक हफ्ते में हालात सामान्य कर दिए। केरल के पूर्व DGP एलेक्जेंडर जैकब ने बाद में लिखा कि “डोभाल ने दंगों को काबू में करने में निर्णायक भूमिका निभाई।”
वर्दी से ज्यादा वक्त जासूसी में
1972 में डोभाल Intelligence Bureau (IB) में शामिल हुए। पूरे करियर में उन्होंने सिर्फ करीब 7 साल पुलिस की वर्दी पहनी, बाकी समय खुफिया दुनिया में बिताया।
- रिटायरमेंट के बाद Vivekananda International Foundation के प्रमुख
- 1988 में मिला Kirti Chakra (शांतिकाल का वीरता पुरस्कार)
वे यह सम्मान पाने वाले भारत के इकलौते पुलिस अधिकारी और सबसे कम उम्र के अफसर हैं।
पाकिस्तान में मुस्लिम बनकर जासूसी
1980 के दशक में डोभाल करीब 7 साल पाकिस्तान में अंडरकवर रहे। लाहौर और इस्लामाबाद में उन्होंने मुस्लिम पहचान के साथ भारत के लिए खुफिया जानकारियां जुटाईं।
खुद डोभाल बता चुके हैं कि लाहौर में एक बार उनकी पहचान लगभग उजागर हो गई थी, लेकिन सूझबूझ से उन्होंने खुद को बचा लिया। इस अनुभव ने उनकी रणनीतिक समझ को और धार दी।
देश के सबसे बड़े मिशनों के मास्टरमाइंड
अजीत डोभाल भारत के कई अहम सुरक्षा अभियानों से जुड़े रहे—
- Operation Blue Star (1984): रिक्शा चालक बनकर स्वर्ण मंदिर के अंदर गए
- Kandahar Hijack (1999): IC-814 मामले में मुख्य वार्ताकार
- 15 से ज्यादा हाईजैकिंग मामलों को सुलझाने में भूमिका
- Uri Surgical Strike (2016) के प्रमुख योजनाकार
- Balakot Air Strike (2019) में अहम रणनीतिक योगदान
- Doklam Standoff (2017) को सुलझाने में बड़ी भूमिका
पीएम मोदी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार
अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है। वे फोन और इंटरनेट का बेहद सीमित इस्तेमाल करते हैं ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो।