Edited By Pardeep,Updated: 08 Mar, 2026 12:48 AM

ईरान ने अमेरिका को लेकर कड़ा बयान दिया है और चेतावनी दी है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश लगभग उसी समय खत्म हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड...
इंटरनेशनल डेस्कः ईरान ने अमेरिका को लेकर कड़ा बयान दिया है और चेतावनी दी है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश लगभग उसी समय खत्म हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता, दृढ़ता और इरादों को गलत तरीके से समझ लिया।
तनाव कम करने की कोशिश नाकाम
ईरान की ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए तैयार थे। लेकिन इसके लिए एक शर्त थी कि पड़ोसी देशों की हवाई सीमा, जमीन या समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के लोगों पर हमला करने के लिए न किया जाए। ईरान का दावा है कि इस शर्त के बावजूद अमेरिका की गलत समझ और आक्रामक रुख के कारण तनाव कम करने की संभावनाएं खत्म हो गईं।
“अगर अमेरिका तनाव बढ़ाएगा तो जवाब मिलेगा”
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर ट्रंप तनाव बढ़ाने का रास्ता चुनते हैं, तो ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं लंबे समय से ऐसी स्थिति के लिए तैयार हैं और उसी तरह जवाब देंगी। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान अपनी आत्मरक्षा की कार्रवाई को और तेज करता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे अमेरिकी प्रशासन पर होगी।
अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान का दावा
ईरान ने यह भी दावा किया कि ट्रंप की एक सप्ताह लंबी सैन्य कार्रवाई से अमेरिकी सेना को करीब 100 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा कई युवा सैनिकों की जान भी गई है। ईरान के मुताबिक जब वैश्विक बाजार दोबारा खुलेंगे तो यह लागत और बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ेगा। विशेष रूप से पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में लोगों को इसका बोझ उठाना पड़ सकता है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की चेतावनी का जिक्र
ईरान ने कहा कि खुद अमेरिका की National Intelligence Council, जो अमेरिका की 18 खुफिया एजेंसियों से जानकारी लेकर आकलन करती है, पहले ही यह निष्कर्ष दे चुकी है कि ईरान के खिलाफ युद्ध सफल नहीं होगा। ईरानी पक्ष का कहना है कि उन्होंने ट्रंप के दूतों को पहले ही चेतावनी दी थी कि युद्ध से अमेरिका की बातचीत की स्थिति मजबूत नहीं होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये चेतावनियां वास्तव में ट्रंप तक पहुंचाई गई थीं या नहीं।
“मध्य पूर्व के युद्ध से दूर रहना चाहते थे अमेरिकी लोग”
ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिकी जनता ने वोट देकर यह उम्मीद जताई थी कि अमेरिका मध्य पूर्व के महंगे और लंबे युद्धों से बाहर निकलेगा। लेकिन इसके बजाय उन्हें ऐसी सरकार मिल गई है जो इजराइल के हितों के लिए युद्ध लड़ रही है। ईरानी बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि बेंजामिन नेतन्याहू ने कई वर्षों की कोशिशों के बाद आखिरकार अमेरिका को इस युद्ध में शामिल कर लिया।
“यह कुछ लोगों की पसंद का युद्ध”
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध कुछ ऐसे लोगों के छोटे समूह द्वारा चलाया जा रहा है जो “इजराइल फर्स्ट” की सोच रखते हैं। उनके अनुसार “इजराइल फर्स्ट” की नीति का मतलब आखिरकार “अमेरिका लास्ट” यानी अमेरिका के हितों को पीछे रखना है। ईरान ने एक बार फिर कहा कि अगर अमेरिका तनाव बढ़ाता है तो उसका जवाब दिया जाएगा और इसके परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिका को ही उठानी पड़ेगी।