Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 28 Feb, 2026 09:28 PM

मध्य-पूर्व में हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की।
नेशनल डेस्क: मध्य-पूर्व में हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। इस अभियान को इजराइल ने “ऑपरेशन लायंस रोर” नाम दिया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस” करार दिया।
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में ईरान के सैन्य अड्डों, मिसाइल लॉन्च साइट्स और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठानों को टारगेट किया गया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रिकॉर्डेड संदेश में कहा कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और संभावित परमाणु खतरे को रोकने के उद्देश्य से की गई है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह ऑपरेशन क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोगियों की रक्षा के लिए आवश्यक था।
ईरान का पलटवार
हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इजराइल की ओर मिसाइलें दागी गईं और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई। तेहरान और अन्य शहरों में धमाकों की खबरें आईं, जबकि इजराइल में एयर-रेड सायरन बजने लगे।
ईरानी मीडिया ने नागरिक ठिकानों पर भी असर पड़ने का दावा किया है। हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी जारी है। दोनों पक्षों के बीच हमलों का सिलसिला जारी रहने से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका गहराती जा रही है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान में कहा कि सभी पक्ष संयम बरतें और तनाव को और बढ़ाने से बचें। भारत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कूटनीतिक संवाद ही स्थायी समाधान का रास्ता है। क्षेत्र में मौजूद भारतीयों को स्थानीय भारतीय मिशनों से संपर्क बनाए रखने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में ईरानी नेतृत्व पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने और इजराइल के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों का आरोप लगाया। वहीं ट्रंप ने ईरानी जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की और कहा कि अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को कमजोर करना है। इन बयानों के बाद कूटनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है कि क्या यह सीमित सैन्य कार्रवाई रहेगी या व्यापक युद्ध का रूप ले सकती है।
मध्य-पूर्व पहले से ही संवेदनशील भू-राजनीतिक संतुलन वाला क्षेत्र है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच सीधे टकराव से वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें आने वाले दिनों पर टिकी हैं—क्या बातचीत का रास्ता खुलेगा या संघर्ष और गहराएगा?