JNU में बड़ा एक्शन: JNUSU छात्र संघ के सभी मुख्य पदाधिकारी 2 सेमेस्टर के लिए सस्पेंड, कैंपस में एंट्री पर रोक

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 11:03 PM

jnu suspends jnusu office bearers for two semesters campus tension escalates

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर छात्र राजनीति उबाल पर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए JNUSU के मौजूदा चारों पदाधिकारियों और एक पूर्व अध्यक्ष को दो सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया है।

नेशनल डेस्क: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक बार फिर छात्र राजनीति उबाल पर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए JNUSU के मौजूदा चारों पदाधिकारियों और एक पूर्व अध्यक्ष को दो सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही सभी को तत्काल हॉस्टल खाली करने और कैंपस से बाहर रहने का निर्देश भी दिया गया है।

निलंबित किए गए छात्रों में JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष किझाकूट गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार शामिल हैं। प्रशासन का आरोप है कि इन छात्रों ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और अन्य निगरानी व्यवस्थाओं के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान अनुशासन भंग किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान लाइब्रेरी के इंफ्रास्ट्रक्चर को क्षति पहुंची, जिसके चलते अनुशासनात्मक कार्रवाई अपरिहार्य हो गई। इसी आधार पर छात्रों को निलंबन के साथ कैंपस से बाहर रहने का आदेश दिया गया है।

वहीं, JNUSU ने प्रशासन के इस फैसले को पूरी तरह राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। छात्र संघ का आरोप है कि यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब JNUSU यूजीसी की Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026 के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा था। यूनियन के मुताबिक, इसी क्रम में मशाल जुलूस और 7 फरवरी को छात्र संसद आयोजित की जानी थी।

छात्र संघ ने यह भी दावा किया कि हाल ही में अदालत द्वारा छात्रों की अवैध हिरासत को लेकर प्रशासन को फटकार लगाई गई थी और स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में निजीकरण विरोधी हड़ताल के बाद प्रशासन दबाव में है। JNUSU का कहना है कि चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (CPO) का मैनुअल छात्र संघ की गतिविधियों या विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों को नियंत्रित नहीं कर सकता।

छात्र नेताओं ने इस फैसले को छात्र-विरोधी बताते हुए कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को बाहर कर कैंपस की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। JNUSU ने छात्र समुदाय से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस कार्रवाई का विरोध करें और छात्र राजनीति तथा अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए आगे आएं।

इस कार्रवाई के बाद JNU कैंपस में माहौल तनावपूर्ण हो गया है और आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन की संभावना जताई जा रही है।

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