UGC 2026 नियम पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई! CJI बेंच करेगी फैसला

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 10:51 PM

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UGC द्वारा जनवरी 2026 में अधिसूचित Higher Education Institutions में इक्विटी बढ़ाने से जुड़े नए नियमों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

नेशनल डेस्क: UGC द्वारा जनवरी 2026 में अधिसूचित Higher Education Institutions में इक्विटी बढ़ाने से जुड़े नए नियमों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इन नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इस अहम मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये नियम जातिगत भेदभाव रोकने के नाम पर सामान्य वर्ग के साथ असमान व्यवहार कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

UGC ने University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई किया था। इनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC वर्ग के खिलाफ भेदभाव को रोकना और समान अवसर सुनिश्चित करना बताया गया है। हालांकि, नियम लागू होने के बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया और अब तक 20 से अधिक याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं।

याचिकाओं में क्या आपत्तियां उठाई गई हैं?

वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत जिंदल समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने नियमों के कुछ प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं—

  • रेगुलेशन 3(c) में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल SC/ST/OBC तक सीमित बताई गई है।
  • इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों और शिक्षकों को शिकायत निवारण और संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखने का आरोप।
  • नियमों को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के खिलाफ बताया गया है।
  • इक्विटी कमेटी में SC/ST/OBC, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, लेकिन सामान्य वर्ग का कोई प्रावधान नहीं।
  • झूठी शिकायतों पर दंड का स्पष्ट नियम नहीं होने से दुरुपयोग की आशंका।
  • अकादमिक बहस या सामान्य बातचीत को भी भेदभाव के दायरे में लाने का खतरा।

याचिकाकर्ताओं की मांग है कि या तो रेगुलेशन 3(c) पर रोक लगाई जाए, या इसे कास्ट-न्यूट्रल बनाया जाए ताकि सभी वर्गों को समान सुरक्षा मिले।

UGC के नए नियमों में क्या-क्या प्रावधान हैं?

UGC के ये नियम 2012 के पुराने फ्रेमवर्क की जगह लाए गए हैं। प्रमुख बिंदु—

  • सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमेटी और Equal Opportunity Centre अनिवार्य।
  • भेदभाव की शिकायतों के लिए जांच व्यवस्था, 24x7 हेल्पलाइन।
  • NEP 2020 के तहत समावेशी और भेदभाव-मुक्त कैंपस बनाना लक्ष्य।
  • ये नियम 2019 में सुप्रीम कोर्ट में हुई PILs (रोहित वेमुला और पायल तड़वी मामलों) के बाद तैयार किए गए।

विरोध और सरकार का पक्ष

देश के कई हिस्सों में सामान्य वर्ग के छात्र संगठनों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होगा।

UGC का दावा है कि ये नियम संवैधानिक दायरे में, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार किए गए हैं और इनका मकसद केवल वास्तविक भेदभाव को रोकना है।
 

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