Edited By Ramanjot,Updated: 29 Jan, 2026 07:13 PM

पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में एक बार फिर झटका लगा है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
नेशनल डेस्क: पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में एक बार फिर झटका लगा है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस केस में उनके साथ सलीम मलिक और अतहर खान को भी जमानत नहीं मिली है। 29 जनवरी 2026 को यह फैसला सुनाते हुए एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ शुरुआती तौर पर गंभीर मामला बनता है, इसलिए उन्हें फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी?
कोर्ट के मुताबिक आरोपों की गंभीरता को देखते हुए prima facie (पहली नजर में) केस बनता है। इससे पहले भी इन आरोपियों की जमानत मेरिट के आधार पर खारिज हो चुकी है। सह-आरोपियों को जमानत मिलने का फायदा इन पर अपने आप लागू नहीं होता। कोर्ट ने साफ किया कि जब एक बार प्रारंभिक राय बन जाती है, तो बिना ठोस नए आधार के उसे बदला नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या असर पड़ा?
इस मामले में 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ अन्य आरोपियों शिफा-उर-रहमान, गुलफिशा फातिमा, सलीम खान, मीरान हैदर और शादाब अहमद को जमानत दी थी। हालांकि निचली अदालत ने कहा कि हर आरोपी की भूमिका अलग होती है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश ताहिर हुसैन और अन्य दो आरोपियों पर सीधे लागू नहीं होता।
दिल्ली पुलिस ने क्या दलील दी?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़ा है। आरोपियों पर हिंसा भड़काने और दंगों की योजना बनाने के आरोप हैं। मामला UAPA और अन्य गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है। यह केस FIR नंबर 59/2020 से जुड़ा है, जिसमें कई आरोपी पहले से जेल में हैं।
पूरा मामला क्या है?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में CAA-NRC विरोध के दौरान बड़े दंगे हुए। इन घटनाओं में 50 से अधिक लोगों की मौत और भारी नुकसान हुआ। दिल्ली पुलिस का दावा है कि दंगे पूर्व-नियोजित साजिश के तहत भड़काए गए। इस केस में उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे नाम भी आरोपी हैं। कुछ को जमानत मिली, लेकिन कई अभी भी जेल में हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद ताहिर हुसैन जेल में ही रहेंगे। जब तक ट्रायल में कोई बड़ा बदलाव या नया आधार सामने नहीं आता
जमानत की संभावना कम मानी जा रही है।यह फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में एक अहम कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।