Edited By Mansa Devi,Updated: 05 Feb, 2026 01:38 PM

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (EPF) उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा का अहम आधार होती है। लेकिन अब खबरें सामने आ रही हैं कि आने वाले वित्त वर्ष 2025–26 के लिए इस फंड पर मिलने वाली ब्याज दर में कमी पर विचार किया जा...
नेशनल डेस्क: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (EPF) उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा का अहम आधार होती है। लेकिन अब खबरें सामने आ रही हैं कि आने वाले वित्त वर्ष 2025–26 के लिए इस फंड पर मिलने वाली ब्याज दर में कमी पर विचार किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की बचत और भविष्य की वित्तीय योजना पर पड़ेगा।
मार्च में हो सकता है अहम फैसला
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक मार्च के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। इस बैठक में मौजूदा लगभग 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को घटाकर करीब 8 से 8.20 प्रतिशत के बीच तय करने पर चर्चा हो सकती है। बताया जा रहा है कि EPFO के निवेश फंड पर दबाव बढ़ने के कारण ब्याज दरों की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है।
ब्याज दर तय होने की प्रक्रिया
EPF की ब्याज दर संगठन द्वारा किए गए निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर आधारित होती है। पहले EPFO की वित्त और निवेश से जुड़ी कमेटियां रिटर्न की समीक्षा करती हैं और अपनी सिफारिशें CBT को देती हैं। इसके बाद बोर्ड की मंजूरी मिलने पर प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की सहमति के लिए भेजा जाता है। अंतिम अधिसूचना श्रम एवं रोजगार मंत्रालय जारी करता है। आमतौर पर तय ब्याज राशि बाद में कर्मचारियों के खातों में जमा की जाती है।
चुनावी माहौल का भी असर संभव
सूत्रों के अनुसार कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए यह भी संभावना है कि सरकार ब्याज दरों में बदलाव न करते हुए उन्हें फिलहाल स्थिर रखे। अंतिम निर्णय पूरी तरह बोर्ड की बैठक और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
वेज सीलिंग पर भी चर्चा
बैठक में EPF के लिए लागू सैलरी सीमा यानी वेज सीलिंग को बढ़ाने का प्रस्ताव भी सामने आ सकता है। अभी यह सीमा 15,000 रुपये है और इसे बढ़ाकर लगभग 25,000 रुपये करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो अधिक कर्मचारियों पर अनिवार्य पीएफ कटौती लागू हो सकती है, जिससे कंपनियों के खर्च पर भी असर पड़ सकता है।