Edited By Mansa Devi,Updated: 06 Mar, 2026 01:01 PM

हाइवे पर टोल भुगतान को आसान बनाने के लिए फास्टैग (FASTag) सिस्टम लागू किया गया है। इसकी मदद से वाहन चालक बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकते हैं और टोल राशि सीधे उनके फास्टैग वॉलेट से कट जाती है।
नेशनल डेस्क: हाइवे पर टोल भुगतान को आसान बनाने के लिए फास्टैग (FASTag) सिस्टम लागू किया गया है। इसकी मदद से वाहन चालक बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकते हैं और टोल राशि सीधे उनके फास्टैग वॉलेट से कट जाती है। हालांकि इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए समय-समय पर फास्टैग अकाउंट को रिचार्ज करना जरूरी होता है।
लेकिन हाल के दिनों में फास्टैग रिचार्ज से जुड़ी साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और उनके पैसे ठग रहे हैं। ऐसे में यूजर्स को रिचार्ज करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है, वरना उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फर्जी वेबसाइट के जरिए हो रही ठगी
साइबर अपराधी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के नाम से मिलती-जुलती कई नकली वेबसाइट बना रहे हैं। जब कोई व्यक्ति इन वेबसाइट्स पर जाकर फास्टैग रिचार्ज करता है, तो भुगतान सीधे ठगों के बैंक खाते में चला जाता है। इससे यूजर का फास्टैग वॉलेट रिचार्ज नहीं होता और उसका पैसा भी वापस नहीं मिलता।
CyberDost ने दी चेतावनी
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली साइबर सुरक्षा एजेंसी CyberDost (I4C) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करके लोगों को इस तरह की ठगी से सावधान रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने एक वीडियो के जरिए समझाया है कि किस तरह साइबर ठग लोगों को फर्जी पोर्टल के जरिए निशाना बना रहे हैं।
वीडियो में दिखाया गया है कि एक व्यक्ति फास्टैग रिचार्ज करने के लिए इंटरनेट पर वेबसाइट खोजता है। तभी उसका दोस्त उसे चेतावनी देता है कि इंटरनेट पर NHAI के नाम से कई नकली पोर्टल मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल ठग लोगों को फंसाने के लिए करते हैं।
फास्टैग यूजर्स को बना रहे निशाना
साइबर ठग सिर्फ फास्टैग रिचार्ज ही नहीं बल्कि फास्टैग एनुअल पास के नाम पर भी लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं। जैसे ही यूजर भुगतान करता है, पैसा सीधे ठगों के खाते में पहुंच जाता है।
ऐसे पहचानें फर्जी वेबसाइट
साइबर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार फर्जी वेबसाइट की पहचान करना मुश्किल नहीं है। कुछ आसान तरीकों से आप इन्हें पहचान सकते हैं।
- वेबसाइट का URL ध्यान से चेक करें और उसकी स्पेलिंग देखें।
- अगर वेबसाइट का पता आधिकारिक वेबसाइट से अलग या गलत लिखा हो, तो सावधान हो जाएं।
- वेबसाइट पर मौजूद फोटो या ग्राफिक्स अक्सर लो क्वालिटी के होते हैं।
- कई बार वेबसाइट का डिजाइन भी अधूरा या असामान्य दिखाई देता है।
सुरक्षित तरीके से करें फास्टैग रिचार्ज
फास्टैग रिचार्ज हमेशा भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही करें। इसके लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, अधिकृत मोबाइल ऐप या विश्वसनीय डिजिटल पेमेंट ऐप का ही इस्तेमाल करना बेहतर होता है। डिजिटल सुविधाएं जहां हमारे काम को आसान बनाती हैं, वहीं साइबर अपराधियों के खतरे भी बढ़ जाते हैं। इसलिए ऑनलाइन भुगतान करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि आपका पैसा सुरक्षित रहे।