Edited By Rohini Oberoi,Updated: 26 Mar, 2026 04:14 PM

रिश्तों की संवेदनहीनता और एक बच्ची की बेबसी का एक दर्दनाक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर वायरल है। बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले में 12 वर्षीय शमीमा अख्तर की करुण पुकार ने प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया। सौतेली मां की प्रताड़ना से तंग आकर यह बच्ची अपनी मां...
Bangladesh Girl Crying at Mother's Grave Viral Video : रिश्तों की संवेदनहीनता और एक बच्ची की बेबसी का एक दर्दनाक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर वायरल है। बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले में 12 वर्षीय शमीमा अख्तर की करुण पुकार ने प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया। सौतेली मां की प्रताड़ना से तंग आकर यह बच्ची अपनी मां की कब्र के पास पहुंची और वहां रोते हुए कहने लगी— "तुम मुझे अपने साथ क्यों नहीं ले गईं? अम्मू, बाहर आओ और मुझे ले चलो।"
क्या है पूरा मामला?
शमीमा के जीवन का संघर्ष 4 साल पहले उसकी मां की मौत के साथ शुरू हुआ। उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली और रोजी-रोटी के चक्कर में सऊदी अरब चले गए। पीछे घर में शमीमा अपनी सौतेली मां आयशा अख्तर के साथ रहने लगी। आरोप है कि पिता की गैर-मौजूदगी में आयशा उस मासूम पर अमानवीय जुल्म ढाती थी।
दो दिनों तक बांधकर दी गई यातना
स्थानीय लोगों और रिपोर्ट्स के अनुसार जुल्म की हद तब पार हो गई जब सौतेली मां ने शमीमा को घर के भीतर बांध दिया और लगातार दो दिनों तक उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। बच्ची के पिता को भी इस बारे में सूचित किया गया था लेकिन विदेश में होने और अन्य कारणों से उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी प्रताड़ना से टूटकर शमीमा घर से भागकर सीधे अपनी मां की कब्र पर जा पहुंची।
Video Viral होते ही एक्शन में प्रशासन
फेसबुक पर जब बच्ची का कब्र से लिपटकर रोने का वीडियो वायरल हुआ तो लोगों में भारी गुस्सा फैल गया। अधिकारियों ने तुरंत दखल देते हुए बच्ची को सौतेली मां के चंगुल से रेस्क्यू किया। सौतेली मां आयशा को गिरफ्तार किया गया हालांकि बाद में भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का 'बॉन्ड' भरवाकर उसे रिहा कर दिया गया। फिलहाल शमीमा को सुरक्षा के लिहाज से उपजिला कार्यकारी अधिकारी के दफ्तर लाया गया है जहां उसकी काउंसलिंग और देखभाल की जा रही है।
मानवीय संवेदनाओं पर सवाल
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे एक पिता की अनुपस्थिति में एक मासूम का बचपन नर्क बन गया। लोग सोशल मीडिया पर मांग कर रहे हैं कि बच्ची को किसी सुरक्षित स्थान या अनाथालय भेजा जाए ताकि उसे दोबारा उस जेल में न जाना पड़े।