Edited By Pardeep,Updated: 20 Jan, 2026 09:14 PM

नोएडा के सेक्टर-150 में मॉल के बेसमेंट में पानी भरने से कार समेत डूबे युवराज की दर्दनाक मौत का मामला अभी देश के ज़हन से उतरा भी नहीं था कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक और डराने वाली और लापरवाही भरी घटना सामने आ गई है। इस हादसे ने एक बार फिर...
नेशनल डेस्कः नोएडा के सेक्टर-150 में मॉल के बेसमेंट में पानी भरने से कार समेत डूबे युवराज की दर्दनाक मौत का मामला अभी देश के ज़हन से उतरा भी नहीं था कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक और डराने वाली और लापरवाही भरी घटना सामने आ गई है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क और पुलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अनियंत्रित होकर पुल से नीचे गिरी कार
मंगलवार दोपहर को गढ़चिरौली जिले में एक कार नियंत्रण खोकर सीधे पुल से नीचे जा गिरी। हादसा इतना भयावह था कि कार दीना नदी के किनारे सूखे हिस्से में गिर गई। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो महिलाओं समेत तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
अंतिम संस्कार से लौट रहे थे सभी लोग
जानकारी के मुताबिक, नागेपल्ली गांव के दो परिवारों के कुल पांच सदस्य एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होकर वापस आष्टी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान दोपहर के समय यह हादसा हुआ। कार जैसे ही पुल पर पहुंची, वह अनियंत्रित हो गई और सीधे नीचे जा गिरी।
पुल पर नहीं था कोई सुरक्षा घेरा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस पुल से कार गिरी, वहां कोई रेलिंग या सुरक्षा घेरा नहीं लगा था। अगर पुल पर बुनियादी सुरक्षा इंतजाम होते, तो शायद यह हादसा टल सकता था। हादसे के बाद घायलों को तुरंत अहेरी के उप-जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
नोएडा के युवराज केस से मिलती-जुलती लापरवाही
इससे पहले नोएडा में युवराज की मौत ने भी प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया था। युवराज की कार घने कोहरे में दीवार तोड़कर पानी में गिर गई थी।
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वहां कोई रिफ्लेक्टर नहीं था
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कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगा था
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ना ही लाइट और सुरक्षा घेरा मौजूद था
गढ़चिरौली का मामला भी लगभग उसी तरह की लापरवाही की कहानी बयान करता है।
प्रशासन की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
नोएडा से लेकर महाराष्ट्र तक, बार-बार हो रहे ऐसे हादसे यह सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर प्रशासन समय रहते क्यों नहीं जागता?
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क्या सुरक्षा इंतजाम सिर्फ हादसों के बाद ही किए जाते हैं?
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क्या लोगों की जान की कीमत इतनी सस्ती है?
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पुल, सड़क और खतरनाक जगहों पर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं होती?
आम लोगों की जान से बड़ा कुछ नहीं
इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही आम लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। अब जरूरत है कि ऐसे हादसों से सबक लेकर पुलों और सड़कों पर तुरंत सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि आगे किसी और परिवार को ऐसी दर्दनाक कीमत न चुकानी पड़े।