कनाडा के बाद अब UK में भारत के खिलाफ सक्रिय हुए खालिस्तानी

Edited By Updated: 25 Sep, 2023 07:12 PM

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कैनेडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो द्वारा अपनी संसद में खड़े होकर आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारत की खुफिया एजेंसियों पर लगाए गए बेतुके आरोपों के बाद अब यू. के. में भी खालिस्तानी ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। पिछले सप्ताह सिख...

कैनेडा: कैनेडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो द्वारा अपनी संसद में खड़े होकर आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारत की खुफिया एजेंसियों पर लगाए गए बेतुके आरोपों के बाद अब यू. के. में भी खालिस्तानी ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। पिछले सप्ताह सिख फैडरेशन यू. के. द्वारा इस मामले में भारत के खिलाफ उगले जहर के बाद अब गुरु नानक गुरुद्वारा स्मैथविक ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर का समर्थन किया है और कैनेडा सरकार से इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 

भारत के कानून के मुताबिक वांछित अपराधी और आतंकी हरदीप सिंह को शहीद बताते हुए लिखा गया हैं कि हरदीप सिंह निज्जर मानवाधिकार कार्यकर्त्ता थे और उनके जैसा ही हश्र अवतार सिंह खंडा का भी किया गया था 15 जून को खंडा की बर्मिंघम के अस्पताल में मौत हो गई थी। गुरुद्वारा कमेटी ने खंडा को भी शहीद बताते हुए लिखा है कि कैनेडा की नैशनल डैमोक्रेटिक पार्टी (एन.डी.पी.) के नेता जगमीत सिंह ने इस बारे में चिंता प्रकट की थी।

गुरुद्वारा कमेटी की तरफ से लिखा गया है कि यू.के. के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को इस मामले में अब कैनेडा का साथ देना चाहिए और कैनेडा की सरकार के साथ मिलकर संयुक्त रूप से मामले की जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही भारत की जेल में बंद जगतार सिंह जौहल की रिहाई की भी मांग की गई है। प्रेस रिलीज में लिखा गया है कि भारत सरकार एक रणनीति के तहत यू. के. और कैनेडा सहित पूरी दुनिया के देशों में सिखों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को दवाने का काम कर रही है।

सिख फैडरेशन की बैठक में की गई भारत विरोधी बयानबाजी 

इससे पहले 18 सितम्बर को सिख फैडरेशन यू. के. के गठन की 20वीं वर्षगांठ के संबंध में बर्मिंघम के गुरुद्वारा स्मैदिक में आयोजित एक कांफ्रेंस के दौरान यू. के. में भी सिख समुदाय को कनाडा की तरह बड़ी राजनीतिक ताकत के तौर पर उभारने पर विचार चर्चा हुई। फैडरेशन की कांफ्रैंस के दौरान वक्ताओं ने भारत विरोधी टिप्पणियां करते हुए कहा कि 2047 से पहले भारत के कई टुकड़े हो जाएंगे। मुठड़ा ने आरोप लगाया कि भारतीय खुफिया एजेंसी एन.आई.ए. भारत में सिख परिवारों को डराने का काम कर रही है, लेकिन इसके बावजूद वे डरेंगे नहीं और उनके खून का एक-एक कतरा खालिस्तान की विचारधारा के प्रति समर्पित है। 

खालिस्तानियों पर कार्रवाई नहीं, शोभायात्रा में हिंदू श्रद्धालु को किया गिरफ्तार
यू. के. की पुलिस ने भारतीय हाईकमिशन पर झंडा उतारने वाले खालिस्तानियों के खिलाफ तो कार्रवाई नहीं की, बल्कि 18 सितम्बर को लसिस्टर शायर में गणपति उत्सव के उपलक्ष्य में शोभायात्रा निकाल रहे हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल गणेश चतुर्थी की शोभायात्रा के दौरान एमरजैंसी सर्विस के एक वर्कर ने गणेश जी की प्रतिमा की बेअदबी करने की कोशिश की तो इसका विरोध करने पर एक 55 वर्षीय कारोबारी धर्मेश लखानी को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें पांच घंटे बाद छोड़ा गया। पुलिस ने इस गिरफ्तारी के मामले में एक प्रैस विज्ञप्ति जारी करके लखानी पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक एमरजेंसी वर्कर पर हमला करने की कोशिश की थी। मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

एन.आई.ए. ने 31 जगहों पर की थी छापेमारी
यू. के. हाईकमिशन के बाहर 19 मार्च को किए गए प्रदर्शन के मामले में नैशनल इन्वैस्टीगेशन एजेंसी ने जांच शुरू करते हुए 1 अगस्त को पंजाब व हरियाणा में 31 स्थानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान एजेंसी ने कई तरह का डिजिटल डाटा जब्त कर लिया था। दरअसल एजेंसी को यह इनपुट मिला था कि लंदन में भारतीय हाईकमिशन पर हुए प्रदर्शन के तार मोगा, बरनाला, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, तरनतारन, लुधियाना, गुरदासपुर, एस. बी. एस. नगर, अमृतसर, श्रीमुक्तसर साहिब, संगरूर, पटियाला, मोहाली और सिरसा से जुड़े हुए थे। यह हमला दल खालसा के गुरचरण सिंह द्वारा किया गया था। इस हमले में खालिस्तानी लिब्रेशन फोर्स के अवतार सिंह खंडा व जसबीर सिंह भी आरोपी थे।

19 मार्च को खालिस्तानियों ने किया था भारतीय झंडे का अपमान
कैनेडा के बाद यू.के. दूसरा देश है, जहां पर खालिस्तानी बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। इन खालिस्तानियों ने आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के विरोध में 8 जुलाई को लंदन में भारतीय हाईकमिशन के बाहर प्रदर्शन किया था और भारत के खिलाफ नारेबाजी की थी। इससे पहले 19 मार्च को लंदन में ही भारतीय हाईकमिशन के कार्यालय के सामने किए गए प्रदर्शन के दौरान खालिस्तानियों ने हाई कमिशन के बाहर लगा भारतीय झंडा उतार दिया था। इस मामले में भारत ने यू.के. के सीनियर डिप्लोमॅट को तलब करके विरोध भी दर्ज करवाया था।

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