Cashless Treatment Scheme: सड़क हादसे के बाद अब सरकार देगी 1.5 लाख रुपये तक तुरंत इलाज खर्च

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 11:47 AM

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भारत सरकार की ओर से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। इस योजना के तहत सड़क हादसे का शिकार हुए किसी भी व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान किया जाएगा। यह कवर हादसे के दिन से लेकर अगले 7 दिनों...

नेशनल डेस्क: भारत सरकार की ओर से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत की सड़कों पर हर साल लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं, जिनमें से 50% को केवल समय पर इलाज देकर बचाया जा सकता है। इसी 'समय' की कीमत को समझते हुए केंद्र सरकार ने एक अभूतपूर्व कैशलेस उपचार योजना शुरू की है। इस पहल का सबसे बड़ा प्रहार उस स्थिति पर है जहां पैसे की कमी या अस्पताल की औपचारिकताएं किसी की जान बचाने के आड़े आती हैं। अब दुर्घटना के शुरुआती 60 मिनट यानी 'गोल्डन आवर' में इलाज सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होगी।

क्या है यह कैशलेस उपचार योजना?
इस योजना के तहत सड़क हादसे का शिकार हुए किसी भी व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान किया जाएगा। यह कवर हादसे के दिन से लेकर अगले 7 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसमें सामान्य चोटों के लिए 24 घंटे और गंभीर स्थितियों में 48 घंटे का तत्काल इमरजेंसी सपोर्ट शामिल है। सबसे खास बात यह है कि अस्पताल को भुगतान के लिए मरीज के परिजनों को परेशान नहीं होना होगा; इसका खर्च 'मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड' से सीधे अस्पताल को दिया जाएगा।

कैसे काम करेगा मदद का नेटवर्क?
हादसा होने पर पीड़ित या कोई भी राहगीर 112 हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है। सूचना मिलते ही सिस्टम सक्रिय हो जाएगा और नजदीकी एम्बुलेंस व अस्पताल की व्यवस्था की जाएगी। यदि वाहन का बीमा है, तो खर्च बीमा कंपनी उठाएगी, लेकिन 'हिट एंड रन' या बिना बीमा वाले वाहनों के मामलों में भी भारत सरकार पूरा खर्च वहन करेगी। प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पुलिस डिजिटल सिस्टम के जरिए 24 से 48 घंटों के भीतर दुर्घटना का सत्यापन करेगी।

भुगतान और निगरानी की पुख्ता व्यवस्था
अस्पतालों को उनके क्लेम का भुगतान राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की मंजूरी के 10 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। योजना की बारीकी से निगरानी के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति को जिम्मेदारी दी गई है। यदि इलाज या भुगतान को लेकर कोई विवाद होता है, तो जिला स्तर पर तैनात शिकायत अधिकारी मामले का निपटारा करेंगे। यह योजना न केवल चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करती है, बल्कि दुर्घटना के समय घायलों की मदद करने वाले 'नेक मददगारों' (Good Samaritans) को भी कानूनी झंझटों से सुरक्षा प्रदान करती है।
 

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