तिब्बती एक्टिविस्ट जेल से बाहर आकर भी कैद ! चीन दिखा रहा सख्ती, परिवार को दी मुंह बंद रखने की धमकी

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 04:33 PM

china accused of extending abuse as tibetan activist sengdra leaves prison

तिब्बती मानवाधिकार कार्यकर्ता ए-न्या सेंगद्रा जेल से रिहा तो हुए हैं, लेकिन उनकी हालत बेहद नाजुक है। आरोप है कि चीन अब भी उन पर निगरानी रखे हुए है, इलाज और आवाज़ उठाने की आज़ादी पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।

International Desk: तिब्बती पर्यावरण कार्यकर्ता और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले A-Nya Sengdra को सिचुआन की जेल से रिहा कर दिया गया है, लेकिन उनकी हालत बेहद कमजोर बताई जा रही है। मानवाधिकार संगठनों और तिब्बती समर्थकों का आरोप है कि जेल से बाहर आने के बावजूद चीनी प्रशासन ने उनका उत्पीड़न खत्म नहीं किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सजा पूरी होने के बाद सेंगद्रा अपने गृह क्षेत्र क्यांगछे टाउनशिप लौटे हैं, लेकिन उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उन्हें और उनके परिजनों को कथित तौर पर चेतावनी दी गई है कि वे उनकी गिरफ्तारी, जेल जीवन या स्वास्थ्य को लेकर कोई बयान न दें, न ही फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करें।

 

तिब्बती मीडिया पोर्टल Phayul के अनुसार, इलाज के लिए क्षेत्र से बाहर जाने तक पर अनुमति जरूरी बताई जा रही है। हाल ही में सामने आई एक तस्वीर में सेंगद्रा का सिर मुंडा हुआ और शरीर बेहद कमजोर नजर आ रहा है, जिससे लंबे कारावास के दौरान कथित लापरवाही और चिकित्सा उपेक्षा की आशंका और गहरी हो गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सेंगद्रा की सात साल की सजा सितंबर 2025 में ही पूरी हो चुकी थी, लेकिन उन्हें बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया के महीनों तक अतिरिक्त हिरासत में रखा गया। इस अतिरिक्त कैद को मनमाना और गैरकानूनी बताया जा रहा है।

 

घुमंतू परिवार में जन्मे सेंगद्रा ने चरागाहों की रक्षा, खनन गतिविधियों के विरोध और गरीबी उन्मूलन फंड में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ स्थानीय स्तर पर आंदोलन खड़ा किया था। उन्हीं गतिविधियों के चलते वे पहले भी गिरफ्तार किए गए और 2018 में सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने जैसे आरोपों में दोबारा जेल भेजे गए।परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है ब्लड प्रेशर और कमजोरी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। अधिकार समूहों का आरोप है कि यह मामला दिखाता है कि जेल से रिहाई के बाद भी असहमति की आवाज़ों को दबाने की नीति जारी है।

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