Edited By Purnima Singh,Updated: 02 Apr, 2026 11:32 AM

दिल्ली में सरकारी तंत्र में कथित भ्रष्टाचार की एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के डिप्टी कमिश्नर लेपिटनेट कर्नल अभिषेक मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी (AO) दिव्यांशु गौतम को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार...
नई दिल्ली: दिल्ली में सरकारी तंत्र में कथित भ्रष्टाचार की एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के डिप्टी कमिश्नर लेपिटनेट कर्नल अभिषेक मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी (AO) दिव्यांशु गौतम को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को बुधवार को राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा।
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक मिश्रा हाल ही में छुट्टियों के लिए वियतनाम जाने वाले थे। 2 अप्रैल से उनकी छुट्टियां पहले ही अप्रूव्ड थीं, लेकिन सीबीआई ने उन्हें टूर पर जाने से तीन दिन पहले ही अरेस्ट कर लिया। मामले में पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल की भी अहम भूमिका रही है। उन्होंने न केवल शिकायत को सीबीआई तक पहुंचाया, बल्कि आरोपियों से तय रिश्वत की राशि जुटाने में भी मदद की। अभिषेक मिश्रा और दिव्यांशु गौतम की गिरफ्तारी उस समय हुई जब मिश्रा 30 मार्च को आयोजित स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में उपस्थित थे। सूत्रों के अनुसार, बैठक समाप्त होने के करीब एक घंटे बाद ही CBI ने दोनों को गिरफ्तार किया।
जांच का दायरा बढ़ा
गिरफ्तारी के बाद CBI की टीम ने शाहदरा नॉर्थ जोन में भी छापेमारी की। इस बार बिल्डिंग विभाग में तैनात इंजीनियर शुभम रावत जूनियर और बेलदार गिरीराज बसल भी CBI की जांच के दायरे में आए। टीम देर शाम तक जोनल बिल्डिंग कार्यालय और आरोपियों के घरों में छानबीन करती रही। हालांकि, खबर लिखे जाने तक दोनों के गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि CBI की तरफ से नहीं की गई थी। दिव्यांशु गौतम का प्रशासनिक करियर भी जांच में आया। सूत्रों ने बताया कि उनका 6 अगस्त 2025 को साउथ जोन के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग से शाहदरा नॉर्थ जोन के डेम्स विभाग में ट्रांसफर किया गया था।
CBI की कार्रवाई से स्पष्ट है कि दिल्ली में MCD के विभिन्न विभागों में चल रहे भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों की गिरफ्तारी से यह भी संकेत मिलता है कि जांच अब और व्यापक स्तर पर हो सकती है। CBI सूत्रों के अनुसार, डिप्टी कमिश्नर मिश्रा और AO गौतम के घरों पर भी छानबीन जारी है, और आगे की जांच में और नाम सामने आने की संभावना है।
इस मामले ने प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत को फिर से उभारा है। अब यह देखना होगा कि CBI की जांच से कितने अधिकारियों पर कार्रवाई होती है और दिल्ली MCD में रिश्वतखोरी का जाल किस हद तक उजागर होता है।