Edited By Mehak,Updated: 24 Feb, 2026 01:38 PM

इस साल 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा। हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक कर्मों से परहेज किया जाता है। यदि किसी की मृत्यु ग्रहण के समय हो जाए, तो शास्त्र अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकता है, लेकिन...
नेशनल डेस्क : इस साल 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा। हिंदू धर्म में ग्रहण को अक्सर अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, हवन और अन्य धार्मिक कर्म नहीं किए जाते। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ग्रहण के दौरान किसी व्यक्ति का देहांत हो जाए, तो अंतिम संस्कार किया जा सकता है या नहीं।
ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यता
हिंदू धर्म में मृतक का शीघ्र अंतिम संस्कार करना बहुत जरूरी माना जाता है। ऐसा इसलिए कि इससे मृतक की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति में मदद मिलती है। सामान्य समय में अंतिम संस्कार में कई रस्में निभाई जाती हैं, जैसे:
- मृतक के सिरहाने तिल के तेल का दीपक जलाना
- गंगाजल का छींटा मृतक के शरीर पर छिड़कना
- तुलसी का पत्ता मृतक के मुंह में रखना
- अंतिम संस्कार में अग्नि प्रज्जवलित करना
लेकिन ग्रहण के दौरान पूजा सामग्री को स्पर्श करना या अग्नि प्रज्ज्वलित करना अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के समय ये कर्म किए बिना अंतिम संस्कार करने से आत्मा की शांति में बाधा आ सकती है।
शास्त्र क्या कहते हैं
गरुड़ पुराण में लिखा है कि मृत्यु के बाद शव का शीघ्र अंतिम संस्कार करना चाहिए। आत्मा की यात्रा के लिए विलंब उचित नहीं माना गया है।हालांकि, ग्रहण और सूर्य ग्रहण जैसी अशुभ अवधि में पारंपरिक पूजा-पाठ नहीं किए जाते। इसलिए शास्त्रसम्मत दृष्टिकोण यह है कि:
- अगर संभव हो तो ग्रहण समाप्त होने के बाद अंतिम संस्कार करें, ताकि सभी धार्मिक कर्म सही तरीके से किए जा सकें।
- लेकिन परिस्थिति अत्यावश्यक हो, तो ग्रहण के दौरान भी अंतिम संस्कार किया जा सकता है, क्योंकि शव को लंबे समय तक बिना दाह किए रखना उचित नहीं माना जाता।