Edited By Radhika,Updated: 03 Apr, 2026 06:09 PM

मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। यूरोपीय संघ (EU) ने अलर्ट दिया है कि है कि ईरान और इजरायल के बीच जारी यह टकराव एक लंबे समय तक चलने वाले ऊर्जा संकट की शुरुआत हो सकता है। यूरोपीय...
Global Energy Crisis 2026: मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। यूरोपीय संघ (EU) ने अलर्ट दिया है कि है कि ईरान और इजरायल के बीच जारी यह टकराव एक लंबे समय तक चलने वाले ऊर्जा संकट की शुरुआत हो सकता है। यूरोपीय संघ अब ईंधन की राशनिंग (ईंधन के सीमित वितरण) और आपातकालीन तेल भंडारों के उपयोग जैसे कड़े कदमों पर विचार कर रहा है।
ऊर्जा की कीमतों में 'लॉन्ग-टर्म' उछाल की संभावना
यूरोपीय संघ ने अपने एक इंटरव्यू में साफ किया है कि दुनिया को अब ऊँची कीमतों के साथ जीने की आदत डालनी होगी। उन्होंने कहा, "यह संकट लंबा खिंचने वाला है और आने वाले हफ्तों में जेट ईंधन और डीजल जैसे आवश्यक उत्पादों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।" विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz में पैदा हुई बाधा और खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
फरवरी से अप्रैल 2026 तक इतनी बढ़ीं तेल-गैस की कीमतें
पिछले दो महीनों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी देखी गई है:
- कच्चा तेल : फरवरी 2026 के अंत तक जो तेल 70-73 डॉलर प्रति बैरल था, वह मार्च में 112 डॉलर के स्तर को पार कर गया। अप्रैल की शुरुआत में यह 104-110 डॉलर के बीच बना हुआ है।
- प्राकृतिक गैस : युद्ध शुरू होने के बाद गैस की कीमतों में 75% तक की तेजी आई है। विशेष रूप से एशियाई LNG की कीमतें फरवरी से अब तक 140% से अधिक बढ़ चुकी हैं।
रसोई पर भी बढ़ेगा बोझ
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने आगाह किया है कि ऊर्जा संकट का सीधा असर अब वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर पड़ रहा है। मार्च में खाद्य कीमतों का सूचकांक पिछले साल सितंबर के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। UN के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार, यदि यह संघर्ष 40 दिनों से अधिक चलता है, तो खेती की लागत (जैसे खाद और परिवहन) इतनी बढ़ जाएगी कि किसान कम बुवाई कर सकते हैं। इसका सीधा असर इस साल के अंत और अगले साल की वैश्विक पैदावार और खाद्य कीमतों पर पड़ेगा।