एलन मस्क की डील ने बदल दी किस्मत, भारतीय मूल के अमन और पाकिस्तान के आसिफ बने अरबपति

Edited By Updated: 18 Jun, 2026 06:12 AM

elon musk s deal changed his fortunes

दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क ने एक बार फिर अपने एक बड़े फैसले से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।

नेशनल डेस्कः दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क ने एक बार फिर अपने एक बड़े फैसले से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। मस्क की कंपनी SpaceX ने कोडिंग की दुनिया में क्रांति लाने वाले एआई प्लेटफॉर्म 'Cursor' की पेरेंट कंपनी 'ऐनीस्फीयर' (Anysphere) को भारी-भरकम 60 अरब डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) में खरीद लिया है। इस महा-सौदा ने दो युवा टेक दिग्गजों अमन सांगर और सुअलेह आसिफ की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी है, जो अब दुनिया के सबसे नए और युवा अरबपतियों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं।

रातों-रात बने 'मल्टी-बिलिनेयर'
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 वर्षीय अमन सांगर और 26 वर्षीय सुअलेह आसिफ, दोनों की ऐनीस्फीयर में लगभग 4.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इस डील के फाइनल होते ही दोनों को 2.7-2.7 अरब डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 22,700 करोड़ रुपये प्रत्येक) मिले हैं। खास बात यह है कि यह एक 'ऑल-स्टॉक' डील है, यानी उन्हें यह रकम कैश के बजाय सीधे तौर पर SpaceX के शेयरों के रूप में मिली है।

भारत से गहरा नाता: IIT बॉम्बे से है अमन का कनेक्शन
अरबपति बनने वाले अमन सांगर की जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं। उनके पिता अरविंद सांगर प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र रह चुके हैं। अमन की माता शिल्पा सांगर एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट हैं और अमेरिका में सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। न्यूयॉर्क में जन्मे अमन ने महज 14 साल की उम्र में कोडिंग शुरू कर दी थी और बाद में मशहूर यूनिवर्सिटी MIT से पढ़ाई की।

पाकिस्तान का 'मैथ जीनियस' बना मस्क का पार्टनर
अमन के साथ इस सफलता के शिखर पर पहुंचने वाले सुअलेह आसिफ पाकिस्तान के कराची के रहने वाले हैं। आसिफ को गणित का जादूगर माना जाता है, जिन्होंने तीन साल तक अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IMO) में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया और कांस्य पदक भी जीता। उन्होंने भी छात्रवृत्ति पर MIT में पढ़ाई की, जहां उनकी मुलाकात अमन से हुई और वहीं से इस सफलता की नींव पड़ी।

क्या है 'Cursor' जिसने मस्क को दीवाना बनाया?
Cursor एक अत्याधुनिक AI कोडिंग प्लेटफॉर्म है, जो 'वाइब कोडिंग' (Vibe Coding) के जरिए डेवलपर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्रोजेक्ट्स लिखने की सुविधा देता है। आज दुनिया भर में लाखों डेवलपर्स इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और Nvidia, Adobe, Uber जैसी दिग्गज कंपनियाँ भी इसकी मुरीद हैं। पिछले साल नवंबर में इसकी वैल्यू 29.5 अरब डॉलर थी, जो मस्क की एंट्री के साथ ही दोगुनी होकर 60 अरब डॉलर पर पहुँच गई है।

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