Edited By Radhika,Updated: 18 Apr, 2026 12:12 PM

केंद्र सरकार EPFO की अनिवार्य वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करने पर विचार कर रही है। इसका मकसद बढती सैलरी और महंगाई के बीच अधिक कर्मचारियों को 'सोशल सिक्योरिटी' के दायरे में लाना है। इसी के साथ ESIC और EPFO की सीमा को एक समान करने का प्लान...
EPFO Salary Limit: केंद्र सरकार EPFO की अनिवार्य वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करने पर विचार कर रही है। इसका मकसद बढती सैलरी और महंगाई के बीच अधिक कर्मचारियों को 'सोशल सिक्योरिटी' के दायरे में लाना है। इसी के साथ ESIC और EPFO की सीमा को एक समान करने का प्लान है, जिससे कि कर्मचारियों का रिटायरमेंट फंड बढ़ेगा।
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इस बदलाव के पीछे का कारण
बीते कुछ सालों में NCR और अन्य औद्योगिक हब में सैलरी रेटों खास वृध्दि हुई है। मौजूदा समय में अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा हो तो वो EPFO कवरेज से बाहर हो सकता है। यानि की सैलरी बढ़ने से कई कुशल कर्मचारी 'यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी' के दायरे से बाहर हो रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बढ़ती महंगाई और वेतन दरों को देखते हुए इस सीमा को अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया था, ताकि वर्कफोर्स का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहे।

ESIC और EPFO की सीमा को एक समान करने की योजना
वर्तमान में ESIC के तहत वेतन सीमा 21,000 रुपये है, जबकि EPFO में यह 15,000 रुपये है। इन दोनों को बरारबर करने का मकसद कंपनियों के लिए Ease of Doing Business में आसानी और अनुपालन के बोझ को कम करना होगा।
कंपनियों पर क्या होगा असर?
वेतन सीमा बढ़ने का सीधा मतलब है कि अब कंपनियों को अधिक संख्या में कर्मचारियों के लिए पीएफ योगदान देना होगा। इससे Employers की बैलेंस शीट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है। दूसरी ओर, कर्मचारियों के PF Balance में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
12 साल बाद बड़ा बदलाव
जानकारी के लिए बता दें कि आखिरी बार साल 2014 में EPFO की वेतन सीमा में बदलाव हुआ था। उस समय इसे 6500 रुपए से बढ़ाकर 15000 किया गया था।