Edited By jyoti choudhary,Updated: 17 Mar, 2026 06:11 PM

आज के डिजिटल युग में जहां किशोरों की स्क्रीन ऑनलाइन शॉपिंग, सेल और सोशल मीडिया ट्रेंड्स से भरी रहती है, उन्हें पैसे का सही मूल्य सिखाना बहुत जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को वयस्क होने का इंतज़ार करने के बजाय, बचपन में ही धन...
नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में जहां किशोरों की स्क्रीन ऑनलाइन शॉपिंग, सेल और सोशल मीडिया ट्रेंड्स से भरी रहती है, उन्हें पैसे का सही मूल्य सिखाना बहुत जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को वयस्क होने का इंतज़ार करने के बजाय, बचपन में ही धन प्रबंधन (Money Management) सीखना चाहिए।
पैसे का प्रबंधन
एक अनिवार्य जीवन कौशल विशेषज्ञों के अनुसार, पैसा संभालना अब केवल बड़ों का काम नहीं रह गया है, बल्कि यह एक आवश्यक जीवन कौशल है। ईमानदारी से की गई बातचीत, व्यावहारिक अनुभव और निरंतर मार्गदर्शन के माध्यम से किशोरों को इस तरह तैयार किया जा सकता है कि वे केवल चलन (Trends) के पीछे भागने के बजाय समझदारी भरे वित्तीय निर्णय लें।
सरल बातचीत करें
अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों से घर की आय, खर्चों और बचत के लक्ष्यों पर खुलकर बात करें। इससे किशोरों को यह समझ आता है कि पैसा कड़ी मेहनत से आता है और वे परिवार के बजट संबंधी निर्णयों के प्रति अधिक समझदार बनते हैं।
केवल पॉकेट मनी काफी नहीं
केवल पॉकेट मनी देना पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय, किशोरों को 'बजट' बनाना सिखाना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उन्हें अपने भत्ते (Allowance) को तीन श्रेणियों में बांटने के लिए प्रोत्साहित करें:
खर्च करना, बचत करना और दान देना। यह तरीका उनमें धैर्य और योजना बनाने की आदत विकसित करता है।
जरूरतों और ट्रेंड्स के बीच अंतर
किशोरों में अक्सर सामाजिक दबाव के कारण हर नए ट्रेंड को अपनाने की इच्छा होती है। अभिभावकों को उन्हें 'जरूरत' (Needs), 'चाहत' (Wants) और 'ट्रेंड्स' (Trends) के बीच अंतर समझाना चाहिए।
मेहनत की कमाई का महत्व
जब किशोर छोटे-मोटे कामों या इंटर्नशिप के जरिए खुद पैसा कमाते हैं, तो वे पैसे कमाने में लगने वाली मेहनत का सम्मान करना सीखते हैं और अपनी खरीदारी को प्राथमिकता देना शुरू करते हैं।
अभिभावक बनें रोल मॉडल
यह देखा गया है कि किशोर वह ज्यादा सीखते हैं जो वे देखते हैं, न कि वह जो वे सुनते हैं। इसलिए, अभिभावकों को खुद स्वस्थ वित्तीय व्यवहार का प्रदर्शन करना चाहिए। परिवार के साथ छुट्टियों की योजना बनाना, खरीदारी के दौरान कीमतों की तुलना करना और बचत के लक्ष्य साझा करना बच्चों में वित्तीय जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो न केवल पैसा कमाना जानती हो, बल्कि उसका सही सम्मान और प्रबंधन करना भी जानती हो।