Edited By Ramanjot,Updated: 29 Jan, 2026 11:08 PM

देशभर में मौसम का मिजाज इन दिनों पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। उत्तर भारत के बड़े हिस्से में जहां घना कोहरा और कड़ाके की ठंड लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है
नेशनल डेस्क: देशभर में मौसम का मिजाज इन दिनों पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। उत्तर भारत के बड़े हिस्से में जहां घना कोहरा और कड़ाके की ठंड लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है, वहीं दक्षिण भारत में हल्की बारिश और समुद्र में बढ़ती हलचल देखी जा रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 7 दिनों का ताजा पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें पहाड़ी इलाकों में एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की चेतावनी दी गई है। इसका असर मैदानी इलाकों तक पहुंचेगा और ठंड और ज्यादा बढ़ सकती है।
उत्तर भारत की बात करें तो दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में आने वाले 3 से 4 दिनों तक घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। सुबह और देर रात के समय दृश्यता बेहद कम हो सकती है, कुछ जगहों पर यह 50 मीटर से भी नीचे जा सकती है। ऐसे हालात में ट्रेन, फ्लाइट और सड़क यातायात पर असर पड़ने की आशंका है।
मौसम विभाग के अनुसार तापमान में 2 से 4 डिग्री तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे कई इलाकों में दिन के समय भी ठंड महसूस होगी। रात का न्यूनतम तापमान 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।
IMD ने यह भी बताया है कि 30 और 31 जनवरी के बीच एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके असर से 31 जनवरी से 3 फरवरी के बीच उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है।
पर्वतीय इलाकों में मौसम और ज्यादा सख्त रहने वाला है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में अगले 48 घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बर्फबारी देखने को मिल सकती है। यहां से चलने वाली ठंडी हवाएं जब मैदानी इलाकों तक पहुंचेंगी, तो ठिठुरन और बढ़ जाएगी। कुछ जगहों पर जमीन पर बर्फ जैसी परत जमने की स्थिति भी बन रही है, जिसे ग्राउंड फ्रॉस्ट कहा जाता है।
दक्षिण भारत में मौसम अपेक्षाकृत अलग रंग दिखा रहा है। तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों में अगले एक हफ्ते तक हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास समुद्र में हलचल बढ़ने की चेतावनी जारी की गई है। तेज हवाओं और ऊंची लहरों को देखते हुए मछुआरों को गहरे समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।