Edited By Anu Malhotra,Updated: 23 Feb, 2026 08:33 AM

देश के पूर्व रेल मंत्री और पश्चिम बंगाल की सियासत को नई दिशा देने वाले Trinamool Congress के आधार स्तंभ रहे Mukul Roy अब हमारे बीच नहीं रहे। 73 वर्ष की आयु में उन्होंने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में देर रात करीब 1:30 बजे आखिरी सांस ली। वह पिछले...
नेशनल डेस्क: देश के पूर्व रेल मंत्री और पश्चिम बंगाल की सियासत को नई दिशा देने वाले Trinamool Congress के आधार स्तंभ रहे Mukul Roy अब हमारे बीच नहीं रहे। 73 वर्ष की आयु में उन्होंने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में देर रात करीब 1:30 बजे आखिरी सांस ली। वह पिछले काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की जानकारी अस्पताल प्रशासन और उनके पुत्र सुभ्रांशु रॉय ने साझा की है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
ममता के सारथी से भाजपा के रणनीतिकार तक का सफर
मुकुल रॉय केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर सत्ता के समीकरण बदलने वाले माहिर खिलाड़ी थे। ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की नींव रखने में उनका योगदान अतुलनीय रहा। 2011 में जब बंगाल से 34 साल पुराने वामपंथी शासन का किला ढहा, तो उसके पीछे मुकुल रॉय का ही दिमाग माना जाता था। वह एक दौर में टीएमसी में 'नंबर दो' की हैसियत रखते थे और संगठन की हर छोटी-बड़ी ईंट उन्होंने ही रखी थी।
उतार-चढ़ाव भरी रही राजनीतिक पारी
मुकुल रॉय का राजनीतिक ग्राफ बेहद दिलचस्प रहा। उन्होंने केंद्र में रेल मंत्री और जहाजरानी राज्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, शारदा और नारदा जैसे विवादों के कारण ममता बनर्जी से उनके रिश्तों में खटास आ गई, जिसके बाद 2017 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में रहते हुए भी उन्होंने अपनी रणनीतिक कुशलता का लोहा मनवाया और 2019 के लोकसभा चुनावों में बंगाल में पार्टी को बड़ी सफलता दिलाई।
दलबदल और आखिरी समय के विवाद
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज करने के ठीक बाद वह वापस अपनी पुरानी पार्टी TMC में लौट आए थे। इस कदम के बाद उन पर दलबदल के आरोप लगे और कानूनी लड़ाई के बाद नवंबर 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। राजनीतिक दांव-पेंच और रणनीतियों के धनी मुकुल रॉय का जाना बंगाल की राजनीति के एक बड़े अध्याय का अंत है।