Edited By Ramanjot,Updated: 10 Feb, 2026 08:31 PM

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ आधिकारिक रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में फंस गई है।
नेशनल डेस्क: पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ आधिकारिक रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में फंस गई है। किताब अभी तक बाजार में आई भी नहीं है, लेकिन इसे लेकर सियासत और मीडिया में तीखी बहस छिड़ चुकी है।
इस पूरे विवाद के बीच पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने साफ किया है कि किताब अब तक प्रकाशित नहीं हुई है और न ही इसकी कोई आधिकारिक कॉपी—चाहे प्रिंट हो या डिजिटल—किसी भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। जनरल नरवणे ने खुद प्रकाशक के इस आधिकारिक बयान को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “This is the current status of the book.”
पेंगुइन इंडिया का बयान, कोई कॉपी वैध नहीं
पेंगुइन इंडिया ने सोमवार और मंगलवार को लगातार दो बयान जारी कर कहा कि ‘Four Stars of Destiny’ के एकमात्र प्रकाशन अधिकार उन्हीं के पास हैं। प्रकाशक के अनुसार किताब अभी न प्रिंट हुई है,न ई-बुक के रूप में जारी की गई है। न ही PDF या किसी अन्य डिजिटल फॉर्मेट में सार्वजनिक की गई है। कंपनी ने यह भी साफ किया कि प्री-ऑर्डर की सुविधा और किताब का आधिकारिक रिलीज दो अलग बातें हैं। प्री-ऑर्डर उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं कि किताब प्रकाशित हो चुकी है।
कॉपीराइट उल्लंघन पर सख्त चेतावनी
पेंगुइन इंडिया ने चेतावनी दी है कि यदि किताब की कोई भी कथित कॉपी—चाहे वह ऑनलाइन वेबसाइट, सोशल मीडिया, PDF, व्हाट्सऐप या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही है—तो यह सीधा कॉपीराइट उल्लंघन है। प्रकाशक ने कहा है कि ऐसी सामग्री को तुरंत हटाया जाए, अन्यथा संबंधित व्यक्ति या प्लेटफॉर्म के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संसद से शुरू हुआ विवाद, राजनीति में आया उबाल
यह मामला उस समय और गरमा गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में इस किताब का जिक्र करते हुए 2020 के भारत-चीन सीमा गतिरोध से जुड़े कुछ दावों का हवाला दिया।
राहुल गांधी ने प्रकाशक के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि या तो जनरल नरवणे गलत हैं या फिर पेंगुइन इंडिया, और उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख पर भरोसा जताया। इसके बाद यह मुद्दा सीधे सरकार, सेना और चीन सीमा विवाद से जोड़ दिया गया।
दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR
सोमवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने किताब की कथित प्री-प्रिंट कॉपी के ऑनलाइन प्रसार को लेकर FIR दर्ज की।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ वेबसाइट्स और प्लेटफॉर्म्स पर किताब की अनधिकृत कॉपी उपलब्ध कराई जा रही थी, जबकि आधिकारिक तौर पर किताब अभी रिलीज ही नहीं हुई है।
जनरल नरवणे का स्पष्टीकरण
जनरल एमएम नरवणे ने सोशल मीडिया पर प्रकाशक का बयान साझा कर यह साफ किया कि किताब अभी प्रकाशन प्रक्रिया में है और कोई भी संस्करण आधिकारिक नहीं है।हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि किताब अमेजन या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है, जिसे पेंगुइन इंडिया ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
सेना, राजनीति और प्रकाशन के बीच संवेदनशील टकराव
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि कैसे एक अप्रकाशित किताब संसद से लेकर मीडिया और सोशल मीडिया तक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। चीन सीमा विवाद जैसे संवेदनशील विषय पर जुड़े दावों के चलते मामला और भी गंभीर हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि किताब के आधिकारिक रिलीज से पहले यह विवाद किस दिशा में जाता है।