Edited By Parveen Kumar,Updated: 09 Apr, 2026 09:10 PM

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 अप्रैल को ईरान संघर्ष में सीजफायर की घोषणा के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अब तेल और गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। हालांकि शुरुआती राहत के बावजूद हकीकत कुछ और ही है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज...
नेशनल डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 अप्रैल को ईरान संघर्ष में सीजफायर की घोषणा के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अब तेल और गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। हालांकि शुरुआती राहत के बावजूद हकीकत कुछ और ही है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी कीमतें तुरंत सामान्य नहीं होंगी और किल्लत खत्म होने में महीनों लग सकते हैं।
सीजफायर के बाद कीमतों में आई गिरावट, लेकिन पूरी राहत नहीं
सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जरूर दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड लगभग 15-16% गिरकर करीब 93.73 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो पहले 110-120 डॉलर तक पहुंच गया था। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी गिरकर करीब 94.52 डॉलर पर आ गया।
नेचुरल गैस की कीमतों में भी करीब 5% की कमी आई है, लेकिन भारत में इसका असर सीमित ही दिख रहा है। कमर्शियल LPG कुछ सस्ती हुई है, जबकि घरेलू सिलेंडर की कीमतों में अभी कोई बड़ी राहत नहीं मिली है।
किल्लत खत्म नहीं, सप्लाई चेन अभी भी प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट सिर्फ शुरुआती राहत है। असल समस्या सप्लाई चेन की है, जो युद्ध के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। फारस की खाड़ी के कई तेल और गैस फील्ड, रिफाइनरी और स्टोरेज प्लांट्स को नुकसान पहुंचा है।
खासकर कतर का रास लाफान गैस हब, जो वैश्विक LNG सप्लाई का बड़ा हिस्सा देता है, अभी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है। ऐसे में भारत जैसे देशों, जो अपनी 60% LPG जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी करते हैं, वहां किल्लत बनी रह सकती है।
होर्मुज खुलने के बाद भी क्यों जारी रहेंगी दिक्कतें?
होर्मुज स्ट्रेट का खुलना सिर्फ एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इससे पूरी व्यवस्था तुरंत पटरी पर नहीं आ सकती। युद्ध के कारण पाइपलाइन, तेल कुएं और रिफाइनरी क्षतिग्रस्त हुए हैं। हजारों टैंकर रास्ते में फंसे हुए हैं और कई जगहों पर मरम्मत का काम बाकी है। ऊर्जा एजेंसियों के मुताबिक, उत्पादन दोबारा शुरू करने और बैकलॉग खत्म करने में लंबा समय लगेगा। यही वजह है कि कीमतों में ‘रिस्क प्रीमियम’ बना रहेगा।
कब मिलेगी पूरी राहत?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में 3 से 6 महीने या उससे ज्यादा समय लग सकता है। कुछ उत्पादन भले ही जल्द शुरू हो जाए, लेकिन पूरी सप्लाई चेन को बहाल करने में समय लगेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टैंकरों में फंसे करोड़ों बैरल तेल को एशियाई बाजार तक पहुंचने में ही कई हफ्ते लग सकते हैं। कतर और UAE के प्लांट्स की मरम्मत भी लंबी प्रक्रिया है।