Edited By Parveen Kumar,Updated: 19 Mar, 2026 06:15 PM

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत तेल और गैस सेक्टर की कंपनियों...
नेशनल डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत तेल और गैस सेक्टर की कंपनियों को अपने संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी नियमित रूप से सरकार को उपलब्ध करानी होगी।
नई अधिसूचना के तहत कंपनियों पर सख्त जिम्मेदारी
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा 18 मार्च को जारी अधिसूचना के मुताबिक, “पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026” लागू किया गया है। इसके दायरे में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरी, एलएनजी आयातक, पाइपलाइन ऑपरेटर, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर और पेट्रोकेमिकल कंपनियां शामिल हैं।
इन सभी को अब पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) को उत्पादन, आयात, खपत और भंडार से जुड़े आंकड़े तय अंतराल- कुछ मामलों में रोजाना- देने होंगे। इस आदेश के साथ पहले लागू गोपनीयता प्रावधानों को खत्म कर दिया गया है।
आयात पर निर्भरता ने बढ़ाई चिंता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश लगभग 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी विदेशों से मंगाता है। संघर्ष से पहले इन आयातों का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था। लेकिन मौजूदा हालात में इस मार्ग के बाधित होने से आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एलपीजी और गैस आपूर्ति पर दबाव
हालांकि सरकार ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन गैस और एलपीजी के मामले में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। खाड़ी देशों से आपूर्ति कम होने के कारण औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीमित गैस मिल रही है, जिससे कई क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है।
रियल-टाइम डेटा से बेहतर फैसलों की उम्मीद
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत होगी। रियल-टाइम डेटा के जरिए आपूर्ति में रुकावट की स्थिति में तुरंत कदम उठाए जा सकेंगे और बिजली, उर्वरक व घरेलू एलपीजी जैसे अहम सेक्टरों को प्राथमिकता दी जा सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, कंपनियों को अब अपनी डेटा रिपोर्टिंग प्रणाली को और आधुनिक बनाना होगा ताकि वे नए नियमों का पालन कर सकें।
कानूनी आधार पर लागू हुआ आदेश
सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया है। यह कानून केंद्र को अधिकार देता है कि वह आवश्यक वस्तुओं से जुड़े उत्पादन, भंडारण, आपूर्ति और वितरण की जानकारी किसी भी संबंधित इकाई से मांग सके। सरकार का मानना है कि यह कदम भविष्य में वैश्विक संकटों के असर को कम करने और देश की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगा।