Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 16 Mar, 2026 09:03 PM

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के बाद लोगों को बड़ी राहत मिली है। Commission for Air Quality Management (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी Graded Response Action Plan (GRAP) के पहले चरण की सभी पाबंदियां तत्काल प्रभाव से समाप्त...
नेशनल डेस्क: दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के बाद लोगों को बड़ी राहत मिली है। Commission for Air Quality Management (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी Graded Response Action Plan (GRAP) के पहले चरण की सभी पाबंदियां तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला किया है।
यह निर्णय 16 मार्च 2026 को हुई समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसमें बताया गया कि Delhi का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) घटकर 119 पर आ गया है। यह स्तर ‘मॉडरेट’ श्रेणी में माना जाता है।
कब लागू हुआ था GRAP-1
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के बाद 14 अक्टूबर 2025 को GRAP के पहले चरण को लागू किया गया था। इस चरण में प्रदूषण कम करने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए थे। इनमें मुख्य रूप से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय, कूड़ा-कचरा और पत्तियां जलाने पर रोक, कोयला या लकड़ी से चलने वाले तंदूर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध और डीजल जनरेटर के सीमित उपयोग जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।
अब क्या रहेगा नियम
वायु गुणवत्ता में सुधार को देखते हुए अब GRAP-1 के तहत लगाए गए सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। हालांकि सामान्य प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियम और निगरानी पहले की तरह जारी रहेंगे। प्राधिकरण ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे प्रदूषण के स्तर पर लगातार नजर बनाए रखें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कदम उठाएं।
सुधार के पीछे क्या वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में आए बदलाव ने प्रदूषण स्तर कम करने में अहम भूमिका निभाई है। हवा की गति बढ़ने, तापमान में बदलाव और सर्दियों के खत्म होने के बाद वातावरण में प्रदूषक कणों का स्तर स्वाभाविक रूप से कम हो गया है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन द्वारा उठाए गए नियंत्रण उपायों का भी सकारात्मक असर देखा गया है।
फिर बढ़ सकता है प्रदूषण
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि AQI दोबारा 201 से ऊपर यानी ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचता है तो GRAP के विभिन्न चरणों के प्रतिबंध फिर से लागू किए जा सकते हैं। इसी वजह से एजेंसियों को सतर्क रहने और प्रदूषण की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।