प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र पहुंचे

Edited By Updated: 11 May, 2026 08:34 PM

honorable prime minister narendra modi arrived at the art of living internationa

आज आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के साथ आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के 45 वर्ष पूर्ण होने और इसके संस्थापक के 70वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में...

नेशनल डेस्क : आज आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के साथ आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के 45 वर्ष पूर्ण होने और इसके संस्थापक के 70वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में सहभागिता की।

माननीय प्रधानमंत्री ने भव्य ध्यान मंदिर का उद्घाटन भी किया, यह एक अद्वितीय उच्च ऊर्जा वाला ध्यान स्थल है, जो विश्व के सबसे बड़े ध्यान समुदायों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। यह समर्पित केंद्र विभिन्न देशों, संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों से आने वाले लाखों साधकों को सामूहिक ध्यान और मंत्रोच्चारण के माध्यम से गहन आंतरिक शांति का अनुभव कराएगा।

नवनिर्मित ध्यान मंदिर का उल्लेख करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि आज उद्घाटित यह ध्यान मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए हजारों लोगों को शांति और सुकून प्रदान करने का केंद्र बनेगा।”

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अपने मुख्य संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव का अभिनंदन करते हुए उन्हें भारत की ‘देने’ की सनातन परंपरा के अनुसार ज्ञान, शांति व आशा देने की जीवंत अभिव्यक्ति बताया। गुरुदेव के साथ एक आत्मीय क्षण साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं आपका ही हूँ और जहाँ हूँ, वहाँ भी आपकी वजह से ही हूँ,” जिस पर उपस्थित जनसमूह ने जोरदार उत्साह व्यक्त किया।

राष्ट्र निर्माण में अध्यात्म और मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “विकसित भारत का निर्माण ऐसे युवाओं द्वारा होगा जो मानसिक रूप से शांत, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और समाज के प्रति संवेदनशील हों। इस यात्रा में आध्यात्मिक कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य, योग और ध्यान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। आर्ट ऑफ लिविंग जैसे संगठन लोगों में जुड़ाव, अपनापन और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं। वे लोगों को अपनी संस्कृति को जानने और समझने का अवसर भी देते हैं।”

राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी के महत्व पर उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि समाज, राजनीति और सरकारों से अधिक शक्तिशाली है। कोई भी सरकार तभी सफल हो सकती है जब समाज राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से भाग ले।”

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संगठन के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि आर्ट ऑफ लिविंग संगठन हमेशा समाज की शक्ति को समर्थन देता है।” भारत की तीव्र प्रगति और युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारी डिजिटल क्रांति ने भारत को डिजिटल भुगतान में वैश्विक नेता बना दिया है। स्टार्टअप्स के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है। हमारे युवा अब अपने उपग्रह अंतरिक्ष में भेज रहे हैं। इन उपलब्धियों का सबसे बड़ा कारण हमारे युवा और आर्ट ऑफ लिविंग हैं। आर्ट ऑफ लिविंग युवाओं को आधुनिक युग की चुनौतियों से उबरने में सहायता कर रहा है।”

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने हाल के वर्षों में भारत में आए परिवर्तन और राष्ट्र में उत्पन्न हुए आत्मविश्वास की भावना पर अपने विचार साझा किए।

गुरुदेव ने कहा, “आपने देश और विदेश में शांति स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। आज भारत माता और भारतवासी गर्व के साथ आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि आपने भारत को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया है।” राष्ट्रीय परिवर्तन और जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए गुरुदेव ने कहा, “जैसे ही आप आए, आपने ‘स्वच्छ भारत’ का आह्वान किया। आज देश अधिक स्वच्छ, अधिक सुंदर, अधिक सुरक्षित और नए आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करता है।” भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा पर गुरुदेव ने कहा, “पहले विदेशों में लोग कहते थे कि भारत कभी इस तरह आगे नहीं बढ़ सकता। आपने उन सभी को गलत साबित कर दिया।”

गुरुदेव ने आगे कहा, “दस वर्षों से भी कम समय में आपने भारत को मांगने वाले देश से देने वाले देश में बदल दिया।” आर्ट ऑफ लिविंग के प्रारंभिक दिनों को याद करते हुए गुरुदेव ने बताया कि संगठन की नींव ही विविध विचारधाराओं के संगम का प्रतीक थी। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रथम ट्रस्टियों में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर शामिल थे। जहाँ एक अत्यंत आध्यात्मिक थे, वहीं दूसरे प्रखर तर्कवादी माने जाते थे, लेकिन दोनों ही गुरुदेव के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर संस्थापक ट्रस्टी बनने के लिए सहमत हुए।

माननीय प्रधानमंत्री ने शिक्षा, युवा और महिला सशक्तिकरण, वनीकरण, पर्यावरण संरक्षण, जनजातीय कल्याण, स्वास्थ्य सेवा, जेल सुधार और डिजिटल साक्षरता से जुड़े समावेशी विकास हेतु नौ राष्ट्रव्यापी सेवा पहलों का शुभारंभ किया।

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मिशन ग्रीन अर्थ के अंतर्गत आर्ट ऑफ लिविंग ने पिछले एक वर्ष में 19 राज्यों और 121 जिलों में 90 लाख से अधिक पौधे लगाए हैं। अब संगठन का लक्ष्य 45 लाख मोरिंगा पौधे तथा 17,500 पंचवटी समूहों के अंतर्गत 87,500 पवित्र वृक्ष; बरगद, पीपल, नीम, आम और औदुंबर लगाने का है, जिससे जलवायु संतुलन, जैव विविधता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा। 

संगठन ने 11 राज्यों में 12 RuTAGe स्मार्ट विलेज सेंटर भी प्रारंभ किए हैं, जो ग्रामीण परिवर्तन के समग्र केंद्र होंगे। युवा नेतृत्व कार्यक्रम और महिला नेतृत्व कार्यक्रम के माध्यम से संगठन 50,000 युवाओं और महिलाओं को नेतृत्व तथा उच्च मांग वाले तकनीकी कौशलों में प्रशिक्षित करेगा, जबकि अब तक 6 लाख से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो चुके हैं।

अभयम प्रोजेक्ट का विस्तार अब 450 गांवों तक किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका के माध्यम से जनजातीय कल्याण को बढ़ावा देना है। वहीं ग्राम डिजिटल सेवक पहल के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे एआई आधारित साधनों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को सरकारी योजनाओं, टेली-हेल्थ और डिजिटल सेवाओं तक पहुँचाने में सहायता कर सकें।

विभिन्न राज्यों में नौ टेलीमेडिसिन केंद्र भी प्रारंभ किए जा रहे हैं, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। आर्ट ऑफ लिविंग ने अपने जेल सुधार कार्यक्रमों के विस्तार की भी घोषणा की, जिसके अंतर्गत 550 जेलों में 1,000 कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनसे लगभग 60,000 कैदियों और कर्मचारियों को तनावमुक्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।

संगठन का निःशुल्क शिक्षा नेटवर्क, जो वर्तमान में 22 राज्यों के 2,754 गांवों में 1,356 विद्यालयों के माध्यम से 1.2 लाख से अधिक बच्चों तक पहुँच रहा है, अब 2,000 विद्यालयों तक विस्तारित किया जाएगा। महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, जिनसे अब तक 6 लाख से अधिक महिलाएँ और बालिकाएँ लाभान्वित हुई हैं, अब 10 लाख महिलाओं और बालिकाओं तक पहुँचने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

माहभर चलने वाले इन उत्सवों में 182 देशों से एक लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, सांसद, उद्यमी, प्रशासनिक अधिकारी, किसान, आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रमों से पुनर्वासित कैदी तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रमुख अतिथियों में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव, उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), तथा हीरानंदानी समूह के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी सहित अनेक विशिष्ट नेता उपस्थित रहे।

साढ़े चार दशकों में आर्ट ऑफ लिविंग विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी मानवीय आंदोलनों में से एक बन चुका है, जिसने श्वास, ध्यान, शिक्षा और जमीनी सेवा के माध्यम से 182 देशों में एक अरब से अधिक लोगों के जीवन को स्पर्श किया है। आज का यह ऐतिहासिक आयोजन इस सरल किंतु शक्तिशाली विचार की पुनर्पुष्टि था कि शांत मन, संवेदनशील समाज और स्वस्थ पृथ्वी संभव है।
 

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